नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरसंघ चालक डॉ मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया भारत को उसके अध्यात्म के लिए महत्व देती है और इस मायने में भारत को विश्व गुरु मानती है, बजाय इसके कि हमारी अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से बढ़ रही है। एक कार्यक्रम में डॉ मोहन भागवत ने कहा कि सभी के साथ अच्छाई बांटने और दूसरों के लिए जीने की भावना ही भारत को महान बनाती है।
संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि अगर हम 3000 अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बन भी जाएं तो दुनिया को इससे कोई आश्चर्य नहीं होगा, क्योंकि कई देश हैं जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। अमेरिका अमीर है, चीन अमीर हो गया है और कई अमीर देश हैं। कई चीजें ऐसी हैं जो अन्य देशों ने की हैं और हम भी करेंगे, लेकिन दुनिया में अध्यात्म और धर्म नहीं है जो हमारे पास है।
संघ प्रमुख ने कहा कि अर्थ (धन) भी महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ ही सभी क्षेत्रों में प्रगति भी जरूरी है, लेकिन भारत सही मायने में विश्व गुरु तब माना जाएगा जब देश अध्यात्म की और आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अध्यात्म और धर्म में यह वृद्धि तब होगी जब हम न केवल त्योहार मनाएंगे और अपनी पूजा पद्धति से काम करेंगे, बल्कि हमारा जीवन भी भगवान शिव की तरह इतना निर्भय हो जाएगा कि हम अपने गले में सांप भी धारण कर सकें। हमारे पास जो गुण, शक्ति और बुद्धि है उसका उपयोग दूसरों के लाभ के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारे अंदर जो भी अच्छाई है, उसे हमें सबके साथ बांटना चाहिए। बुराई कुछ हद तक मौजूद है, लेकिन उसे रोका जाना चाहिए और उसे फैलने नहीं देना चाहिए। हमें नकारात्मकता को कभी दूसरों को नहीं देना चाहिए। बल्कि उसे अपने भीतर समेटकर उसे खत्म करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर अच्छाई बांटनी चाहिए। हमें इसी तरह जीना चाहिए ज्यादा से ज्यादा लोग हमसे जुड़ें। अच्छाई बांटने और दूसरों के लिए जीने की यही भावना भारत को सचमुच महान बनाती है।

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