न्यूयॉर्क.
संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में तत्काल सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र के 78वें सत्र की अनौपचारिक बैठक के दौरान, कंबोज ने लंबी चर्चा पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने जोर दिया कि 2000 में आयोजित मिलेनियम शिखर सम्मेलन में वैश्विक नेता व्यापक सुधारों के लिए प्रतिबद्ध हुए थे। 2000 के बाद अब तक एक चौथाई शताब्दी बीत चुकी है।
कंबोज ने बैठक में मौजूदा व्यवस्था को चेतावनी देते हुए कहा कि अब सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता है। दुनिया और हमारी आने वाली पीढ़ियां अब और इंतजार नहीं कर सकती हैं। उन्हें और कितना इंतजार करना होगा। कंबोज ने युवा पीढ़ी की आवाज पर ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने आग्रह किया कि अफ्रीका में जारी अन्याय को संबोधित करना आवश्यक है। इसलिए परिषद में सुधार की आवश्यकता है।
वीटो पर भी रखा पक्ष
वीटो शक्ति पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि सुधार प्रक्रिया में वीटो बाधा नहीं बन सकती। परिषद में जब तक नए स्थाई सदस्यों को जगह नहीं मिल जाती तब तक वीटो का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। नए स्थायी सदस्यों के पास भी वर्तमान स्थायी सदस्यों के समान ही जिम्मेदारियां और दायित्व हों। हमारा मानना है कि सुधार प्रक्रिया के मुद्दे पर वीटो करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। जी4 देशों ने भी भारत के पक्ष का समर्थन किया। बता दे, जी4 में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं।

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