इंदौर
5383 वकीलों ने अब तक न सनद का सत्यापन करवाया है न ही किसी तरह का घोषणा पत्र भरा है। इंदौर अभिभाषक संघ ने इन वकीलों की सूची जारी कर दी है। 106 पेज की इस सूची में जिन अभिभाषकों के नाम हैं उन्हें 30 नवंबर 2023 तक अनिवार्य रूप से सनद का सत्यापन या घोषणा पत्र जमा कराना होगा। ऐसा नहीं करने वाले अभिभाषकों को राज्य अधिवक्ता परिषद और राज्य शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। इतना ही नहीं सत्यापन या घोषणा पत्र नहीं भरने वालों को राज्य अधिवक्ता परिषद और अभिभाषक संघ के निर्वाचन में मतदान का अधिकार भी नहीं रहेगा।
इंदौर अभिभाषक संघ के अध्यक्ष गोपाल कचोलिया ने बताया कि राज्य अधिवक्ता परिषद की प्रशासनिक समिति (बार कौंसिल आफ इंडिया सर्टिफिकेट एंड प्लेस प्रैक्टिस वैरीफिकेशन नियम 2015 के अन्तर्गत समिति) की हाल ही में हुई बैठक में प्रस्ताव पारित हुआ है कि बार कौंसिल आफ इंडिया सर्टिफिकेट एंड प्लेस आफ प्रैक्टिस वैरीफिकेशन नियम 2015 के अंतर्गत 1 अप्रैल 2011 के पूर्व नामांकित अभिभाषकों को सत्यापन फार्म एवं 1 अप्रैल 2011 के बाद नामांकित अभिभाषकों को घोषणा फार्म अनिवार्य रूप से भरना है। ऐसा नहीं करने वाले अभिभाषकों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाएगा।
जल्द जमा करवाना होंगे सत्यापन फार्म
कचोलिया ने बताया कि जिन अभिभाषकों ने 2015 से लेकर आज दिनांक तक अपनी सनद के सत्यापन के लिए फार्म या घोषणा फार्म नहीं भरे हैं, वे इसे भरकर अभिभाषक संघ के कार्यालय में फार्म की फोटोकापी जमा करवा दें। नए नियमानुसार राज्य अधिवक्ता परिषद द्वारा राज्य अधिवक्ता परिषद और अभिभाषक संघ के चुनाव हेतु फोटोयुक्त मतदाता सूची तैयार की जाती है। इसमें केवल सनद का सत्यापन करवाने वाले अभिभाषकों का नाम ही शामिल रहता है।

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