भोपाल.
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने टिकट को लेकर काफी लंबी कवायद की। टिकट बांटने का आधार जहां कांग्रेस ने अपने जमीनी कार्यकर्ताओं और नेताओं से फीडबैक लिया, वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने दो सर्वे करवाए थे। राहुल गांधी ने सुनील कानूगोलू की टीम से एक सर्वे कराया था। सर्वे के लिए कानूगोलू की टीम ने हर सीट पर जाकर काम किया। इसी तरह कमलनाथ ने दो एजेंसियों से यह सर्वे कराया था। दोनों ही एजेंसियों ने अलग-अलग सर्वे करके दिया था। इन तीनो सर्वे के अलावा स्क्रीनिंग कमेटी ने जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारियों से भी दावेदारों को लेकर नाम लिए थे। कांग्रेस ने ब्लॉक अध्यक्षों से भी दावदारों के नाम मांगे थे।
इन सभी नामों पर स्क्रीनिंग कमेटी ने सितम्बर में लगातार तीन दिन तक चर्चा की थी। इस चर्चा में यह तय हो गया था कि अधिकांश विधायकों को टिकट दिए जाने हैं। जिसमें से 69 विधायकों को टिकट दिए जा चुके हैं। इसी बीच भाजपा ने केंद्रीय मंत्री और सांसदों को टिकट देकर कांग्रेस को चौंका दिया था। जिसमें चलते कांग्रेस को भी कुछ सीटों पर अपनी रणनीति बदलना पड़ी। सितम्बर महीने के अंत में हुई स्क्रीनिंग कमेटी की बैइक में कांग्रेस ने सितम्बर में करीब सवा सौ उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए थे। इसके बाद 13 अक्टूबर को हुई बैठक में यह तय हो गया था कि 144 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान किया जाएगा। पितृपक्ष के बाद नवरात्रि शुरू होते ही इस लिस्ट को जारी करना था। कांग्रेस के नेताओं का यह भी दावा है कि उसने शुभ मूहुर्त और अंक ज्योतिष के अनुसार ही अपने उम्मीदवारों का ऐलान समय पर किया है।

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