गर्मी के तेवर अपने चरम पर हैं और देश के कई राज्यों समेत राजधानी दिल्ली में सूरज की तपिश अब बर्दाश्त के बाहर होती जा रही है. यहां का पारा पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार भी पहुंच चुका है जिसके चलते आम लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है. लेकिन इसका सबसे खतरनाक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के हॉस्पिटल में गर्मी के कारण प्रेगनेंसी से जुड़ी समस्याओं वाली महिलाओं की संख्या काफी बढ़ गई है. डॉक्टर्स का कहना है कि बढ़ता तापमान न केवल मां की सेहत बिगाड़ रहा है, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे की ग्रोथ को भी रोक रहा है.
गर्मी से समय से पहले डिलीवरी का जोखिम
मलिक रेडिक्स हेल्थकेयर की डायरेक्टर डॉ. रेनू मलिक का कहना है गर्मी की वजह से प्री-टर्म लेबर (समय से पहले प्रसव) के मामले बढ़ रहे हैं. शरीर का तापमान बढ़ने से स्ट्रेस पैदा होता है जो डिलीवरी की प्रक्रिया को वक्त से पहले शुरू कर सकता है.
वहीं डॉक्टरों के मुताबिक, जब तापमान 45 डिग्री के आसपास होता है तो शरीर में पानी की कमी होने लगती है. इससे गर्भाशय में ब्लड फ्लो कम हो जाता है और ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन समय से पहले एक्टिव हो सकते हैं.
बच्चे के वजन और ग्रोथ पर बुरा असर
गर्मी सिर्फ मां के लिए ही नहीं बल्कि भ्रूण के लिए भी घातक है. रिपोर्ट बताती है कि हीट स्ट्रेस के कारण प्लेसेंटा तक पोषण सही तरह से नहीं पहुंच पाता. इसका सीधा परिणाम 'लो बर्थ वेट' यानी जन्म के समय बच्चे का वजन कम होना है.
इसके अलावा लंबे समय तक धूप में रहने वाली महिलाओं में प्री-एक्लेम्पसिया (हाई ब्लड प्रेशर) का खतरा भी बढ़ जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि दोपहर 11 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें और शरीर को हाइड्रेटेड रखें.

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