नई दिल्ली
भारतीय सेना की लड़ाकू क्षमता में बड़ा बढ़ोतरी होने वाली है. अमेरिका से खरीदे गए छह अपाचे AH-64E अटैक हेलीकॉप्टरों का अंतिम बैच (तीन हेलीकॉप्टर) इस महीने भारत पहुंचने वाला है. ये दुनिया के सबसे आधुनिक अटैक हेलीकॉप्टर हैं, जिन्हें 'हवा में उड़ता हुआ टैंक' कहा जाता है. ये जोधपुर में तैनात किए जाएंगे, जहां पाकिस्तान से लगी पश्चिमी सीमा पर सेना की स्ट्राइक पावर काफी मजबूत हो जाएगी.
डिलीवरी की पूरी कहानी
फरवरी 2020 में अमेरिका के साथ लगभग 5,691 करोड़ रुपये का सौदा हुआ था. इस करार के तहत सेना को छह अपाचे मिलने थे. लेकिन सप्लाई चेन की समस्याओं, तकनीकी मुद्दों और ग्लोबल कारणों से डिलीवरी में काफी देरी हुई. मूल योजना में 2024 में सभी हेलीकॉप्टर आने थे, लेकिन पहला बैच (तीन हेलीकॉप्टर) जुलाई 2025 में हिंडन एयरबेस पर पहुंचा. ये अमेरिकी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से लाए गए थे.
अब अंतिम तीन हेलीकॉप्टर दिसंबर 2025 में आने वाले हैं. ये भी असेंबल और इंस्पेक्शन के बाद जोधपुर भेजे जाएंगे. पूरा ऑर्डर पूरा होने के बाद सेना की पहली अपाचे स्क्वाड्रन पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएगी.
अपाचे की विशेषताएं क्यों खास हैं?
अपाचे AH-64E दुनिया का सबसे उन्नत अटैक हेलीकॉप्टर है. इसकी मुख्य खूबियां…
हथियार: हेलफायर मिसाइलें (टैंक और बंकर मारने के लिए), स्टिंगर एयर-टू-एयर मिसाइलें, 30 एमएम चेन गन और रॉकेट.
टेक्नोलॉजी: एडवांस्ड रडार, नाइट विजन, सभी मौसम में उड़ान और दुश्मन के हमलों से बचाव.
क्षमता: दुश्मन के टैंक, एयर डिफेंस और सैनिकों पर सटीक हमला. रात में भी ऑपरेशन. जमीन की सेना को क्लोज एयर सपोर्ट.
ये हेलीकॉप्टर जोधपुर की 451 एविएशन स्क्वाड्रन में तैनात होंगे, जो मार्च 2024 में बनाई गई थी. पायलट और ग्राउंड स्टाफ पहले ही अमेरिका में ट्रेनिंग ले चुके हैं.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्यों जरूरी?
मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसमें पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए. इस ऑपरेशन ने पश्चिमी सीमा पर मजबूत एरियल फायरपावर की जरूरत दिखाई. अपाचे ऐसे हाई-इंटेंसिटी कॉन्फ्लिक्ट में गेम चेंजर हैं. ये सेना को ग्राउंड फोर्सेस के साथ सीधा सपोर्ट देंगे, जबकि वायुसेना के 22 अपाचे अलग रोल निभाते हैं.
सेना एविएशन कोर के अन्य एसेट्स
भारतीय सेना एविएशन कोर के पास कई हेलीकॉप्टर और एसेट्स हैं…
ध्रुव (ALH Dhruv): स्वदेशी मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर, ट्रांसपोर्ट और रेकॉनिसेंस के लिए.
रुद्र: ध्रुव का हथियारबंद वर्जन, एंटी-टैंक मिशन.
लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH प्रचंड): हाई एल्टीट्यूड के लिए, ऑफेंसिव मिशन.
चीता और चेतक: लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर.
Mi-17: ट्रूप ट्रांसपोर्ट.
UAV: हेरॉन और सर्चर सर्विलांस के लिए.
डॉर्नियर 228: फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट.
अपाचे आने से सेना की अटैक कैपेबिलिटी सबसे मजबूत होगी.
आगे की योजना
पूर्ण इंडक्शन के बाद स्क्वाड्रन ट्रेनिंग और एक्सरसाइज करेगी. सेना भविष्य में और अपाचे खरीदने पर विचार कर रही है. ये भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग का बड़ा उदाहरण है. पश्चिमी सीमा पर तनाव को देखते हुए ये डिलीवरी सेना की तैयारियों को नई ताकत देगी. स्वदेशी प्रचंड हेलीकॉप्टर भी जल्द बड़े नंबर में आएंगे, जो आत्मनिर्भरता बढ़ाएंगे.

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