उष्ट्रासन
यह आसन रीढ़ की हड्डी और पेट की मांसपेशियों को खींचता है, जिससे मूत्र प्रवाह में सुधार होता है और पथरी को बाहर निकलने में मदद मिलती है.
भुजंगासन
यह आसन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और पाचन में सुधार करता है, जिससे पथरी बनने की संभावना कम होती है.
विपरीत करणी
यह आसन रक्त परिसंचरण में सुधार करता है और गुर्दे पर दबाव कम करता है, जिससे पथरी से होने वाले दर्द से राहत मिलती है.
पवनमुक्तासन
यह आसन पेट की मसाज करता है और गैस को बाहर निकालता है, जिससे पथरी बनने की संभावना कम होती है.
धनुरासन
यह आसन रीढ़ की हड्डी और पेट की मांसपेशियों को खींचता है, जिससे मूत्र प्रवाह में सुधार होता है और पथरी को बाहर निकलने में मदद मिलती है.
ध्यान रखें
इन योगासनों का अभ्यास करने से पहले किसी योग प्रशिक्षक की सलाह जरूर लें. यदि आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है तो इन योगासनों का अभ्यास न करें. पथरी से पीड़ित होने पर, तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. साथ ही इन योगासनों के नियमित अभ्यास के साथ-साथ, पथरी से बचाव के लिए भरपूर पानी पीना, स्वस्थ आहार लेना और नियमित व्यायाम करना भी महत्वपूर्ण है.

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