नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भीमा कोरेगांव मामले की आरोपी प्रो. शोमा के. सेन की जमानत याचिका पर सुनवाई टाल दी।
न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की खंडपीठ ने मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए स्थदगित करते हुये याचिकाकर्ता को एनआईए द्वारा दायर जवाबी हलफनामे पर प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति दी। पीठ ने कहा कि वह अंतरिम जमानत की मांग करने वाली दोनों अर्जियों और विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख पर एक साथ सुनवाई करेगी।
शीर्ष अदालत ने 23 अगस्त को प्रोफेसर सेन द्वारा चिकित्सा कारणों से अस्थायी रिहाई की मांग करने वाली अंतरिम जमानत याचिका पर आतंकवाद विरोधी एजेंसी से प्रतिक्रिया मांगी थी। सेन ने बॉम्बे हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां रिहाई की मांग करने वाली उनकी अर्जी का निपटारा कर दिया गया था और जांच एजेंसी द्वारा उनके और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर करने के बाद उन्हें विशेष एनआईए अदालत के समक्ष जमानत के लिए नए सिरे से आवेदन करने के लिए कहा गया था।
इससे पहले दिसंबर 2021 में, उच्च न्यायालय ने वकील-कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज को डिफ़ॉल्ट जमानत दी थी। हालाँकि, न्यायमूर्ति एस.एस. शिंदे और न्यायमूर्ति एन.जे. जमादार की खंडपीठ ने सीनेटर सहित इसी मामले में आठ अन्य सह-अभियुक्तों के आवेदनों को अस्वीकार कर दिया था।

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