ग्वालियर
मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों में अधीक्षक के पद पर पदस्थ डॉक्टर अब प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। प्रदेश सरकार ने अधीक्षक पद पर रहते हुए डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की सचिव सुरभि गुप्ता ने आदेश जारी कर इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।
दरअसल, आदेश में प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में अधीक्षक के पद पर पदस्थ चिकित्सक की जिम्मेदारी को पूर्णकालिक प्रशासकीय पद बताया गया है। लिहाजा यह जरूरी है कि इस पद पर पदस्थ चिकित्सा शिक्षक अपना पूरा समय एकाग्र रूप से दे पाए। लिहाजा आदेश दिए गए है कि अधीक्षक पद पर पदस्थ चिकित्सा शिक्षक किसी भी प्रकार से निजी व्यावसायिक चिकित्सकीय गतिविधियों का संचालन न करें।
नियमित और प्रभारी दोनों पर रोक
प्रदेश में कुछ मेडिकल कॉलेज ऐसे है जहां अधीक्षक पद पर नियमित पदस्थापना है। वहीं ज्यादातर मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पतालों में प्रभारी के रूप में चिकित्सा शिक्षकों को पदस्थ किया गया है। इन्हीं प्रभारी अधीक्षकों द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस की जा रही थी, इससे अस्पताल की व्यवस्थाओं के संचालन में परेशानी सामने आ रही थी। लिहाजा अधीक्षक पद पर पदस्थ नियमित और प्रभारी दोनो की ही प्रैक्टिस पर सरकार ने रोक लगा दी है।
मिलेगा अव्यवसायिक भत्ता
अधीक्षक पद पर पदस्थ चिकित्सा शिक्षकों से प्राइवेट प्रैक्टिस करने का अधिकार छीनने के बाद अब उन्हें अव्यवसायिक भत्ता दिए जाने के आदेश भी दिए गए हैं। शासन इन चिकित्सा शिक्षकों को नियमानुसार अव्यवसायिक भत्ता देगा।

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