नई दिल्ली
ऑपरेशन पराक्रम के दौरान बीमार हुए वायुसेना के जवान को खून चढ़ाए जाने के बाद एचआईवी संक्रमण हो गया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 1.5 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस लापरवाही के लिए कोर्ट ने वायुसेना और सेना को जिम्मेदार बताया है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जो जवान देश के लिए जान बलिदान करने को तैयार रहते हैं उनको उत्तम गुणवत्ता की सुरक्षा भी दी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जवान के प्रति देखभाल में लापरवाही के चलते उन्हें कोर्ट आना पड़ गया। इस मेडिकल लापरवाही के लिए 1 करोड़ 54 लाख, 73 हजार क् मुआवजा दिया जाए। यह राशि भारतीय वायुसेना देगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जवान की विकलांगता पेंशन से जुड़ी जो भी राशि बाकी है उसे डेढ़ महीने के अंदर दे दिया जाए। बता दें कि इससे पहले राष्ट्रीय उपभोक्ता विवा निवारण आयोग रिटायर्ट अधिकारी सीपीएल आशीष कुमार चौहान के दावे को खारिज कर दिया था। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन पराक्रम के दौरान बीमार पड़ने का बाद जवान को 171 मिलिट्री हॉस्पिटल सांबा में जुलाई 2002 में ऐडमिट करवाया गया था। इसके बाद उन्हें एक यूनिट खून चढ़ा गया। 2014 में जब वह बीमार पड़े तो अपना टेस्ट करवाया। तब पता चला कि उन्हें एचआईवी है। शीर्ष अदालत ने माना कि अस्पताल ने कोई लापरवाहीकी है। वहीं कोर्ट ने एचआईवी पीड़ितों के मामलों को प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए हैं।

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