नई दिल्ली
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में कांग्रेस बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। ताजा रुझानों में बीजेपी 55 सीटों पर आगे चल रही है जबकि कांग्रेस अब तक 33 सीटों पर भी जीत दर्ज कर सकी है। इस बीच यहां की साजा विधानसभा सीट पर मुकाबला सबसे दिलचस्प नजर आ रहा है। दरअसल यहां कांग्रेस नेता और मंत्री रविंद्र चौबे के सामने बीजेपी ने ईश्वर साहू बतौर उम्मीदवार मैदान में उतारा था। ताजा रुझानों में ईश्वर साहू ने कांग्रेस के रविंद्र चौबे को पीछे छोड़ दिया है। ये खबर इसलिए बड़ी है क्योंकि ईश्वर साहू का कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं जबकि रविंद्र चौबे मंत्री होने के साथ-साथ 6 बार के विधायक है।
दरअसल ईश्वर साहू का नाम उस वक्त चर्चा में आया, जब यहां के एक गांव बिरनपुर में सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में उनके बेटे भूवनेश्वर साहू की मौत हो गई थी। जिसके बाद क्षेत्र में काफी तनाव पैदा हो गया था। अब इसी के चलते बीजेपी ने ईश्वर साहू को चुनावी मैदान में उतारा था जिसे पार्टी के स्मार्ट मूव के तौर पर देखा जा रहा था। हालांकि इसके साथ पार्टी ने रिस्क लिया था क्योंकि उनके सामने कांग्रेस से 6 बार के विधायक रविद्र चौबे मैदान में है।
साजा विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़
वहीं ईश्वर साहू का कहना था कि उन्हें हिंदुत्व को जगाने के लिए बीजेपी की ओर टिकट मिला है और उनका एक ही लक्ष्य है जो भुवनेश्वर साहू के साथ हुआ वो और किसी के साथ ना हो। बता दें, साजा विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रही है। 2013 को छोड़कर हर बार पार्टी ने इस सीट से जीत दर्ज की है। अगर इस बार बीजेपी आम उम्मीदवार के साथ कांग्रेस के कब्जे से ये सीट छीनने में कामयाब होती है, तो पार्टी और ईश्वर साहू के लिए ये वाकई बहुत बड़ी जीत होगी।

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