जगदलपुर.
जगदलपुर के माचकोट वन क्षेत्र में एक दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी ने जंगलों की समृद्ध जैव विविधता को फिर सुर्खियों में ला दिया है. लंबी पूंछ वाले नाइटजार, जिसे स्थानीय भाषा में “कापू चड़ई” और हिंदी में “रात की चिड़िया” कहा जाता है, को कैमरे में कैद किया गया है.
यह पक्षी दिनभर झाड़ियों और पेड़ों की निचली शाखाओं में छिपकर आराम करता है, इसलिए इसे देख पाना बेहद मुश्किल माना जाता है. रात होते ही यह सक्रिय हो जाता है और उड़ते हुए कीट-पतंगों का शिकार करता है. विशेषज्ञों के अनुसार यह प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण कर किसानों के लिए भी लाभकारी साबित होता है. इसकी विशेष आवाज जंगलों में इसकी उपस्थिति का संकेत देती है.
भारत के अलावा चीन, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में भी यह प्रजाति पाई जाती है. वन अधिकारियों का कहना है कि माचकोट क्षेत्र दुर्लभ पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास बनता जा रहा है. इस खोज ने एक बार फिर साबित किया है कि कोंडागांव के जंगल जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं.

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