भोपाल
प्रदेश में पिछले 14 सालों में दो शहरों में तीन बार पुलिस का सिस्टम बदल गया, हर नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और गांव की आबादी बढ़ गई, लेकिन पुलिस में नए थाना खोलने एवं थाने में पुलिस बल को लेकर 14 साल पुराना ही मापदण्ड चला आ रहा है। इसके अनुसार ही प्रदेश में नए थाने खोले जाने का प्रस्ताव तैयार होते हैं और उसी आधार पर पुलिस बल को यहां पर पदस्थ किया जाता है।
प्रदेश में नए पुलिस थाने खोलने को लेकर 2010 में मापदंड बनाए गए थे। जिसमें नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्रामीण क्षेत्र में अलग-अलग मानक बनाए गए थे। नए थाने के मानक बनाए जाने के कुछ दिन बाद ही प्रदेश के भोपाल और इंदौर शहर में एसएसपी सिस्टम लागू किया गया था। उस वक्त नगर निगम क्षेत्र में नया थाना खोलने पर वहां कम से कम 74 पुलिसकर्मियों को पदस्थ किए जाने का मापदंड बनाया गया था।
मापदंड भी हुए फेल
नए थाने खोलने के लिए जो मानक तय किए गए थे, उसके अनुसार प्रदेश के थानों में उपनिरीक्षक पदस्थ ही नहीं हैं। 25 नवंबर 2010 में बनाए गए मापदंड के अनुसार नगर निगम और नगर पालिका सीमा में नए थाने खोलने पर वहां एक निरीक्षक और आठ उपनिरीक्षकों को पदस्थ किया जाना होता है। इसके साथ ही दस सहायक उपनिरीक्षक, 14 प्रधान आरक्षक और 42 आरक्षक थाने में पदस्थ किए जाने होते थे, इसी तरह नगर पंचायत के थानों में एक निरीक्षक, तीन उपनिरीक्षक, 6 सहायक उपनिरीक्षक और 29 आरक्षक , वहीं ग्रामीण
पुलिस थानों में एक उपनिरीक्षक, 4 सहायक उपनिरीक्षक, 9 प्रधान आरक्षक और 21 आरक्षकों का बल दिया जाना होता है। जबकि हालात यह हैं कि प्रदेश के अधिंकाश नगर पालिका क्षेत्र के थानों में आठ उपनिरीक्षक ही पदस्थ नहीं हैं। आरक्षकों की संख्या में थानों में कम हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में लगभग 1150 थाने हैं। जिसमें से यह मापदंड बनाए जाने के बाद 200 से ज्यादा थाने प्रदेश में नए खुल चुके हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश थानों में बल की संख्या तय मानक से कम ही है।

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