नई दिल्ली
कोविड का JN.1 वेरिएंट दुनिया में तेजी से पांव पसार रहा है। सिंगापुर में एक ही हफ्ते में 56 हजार से ज्यादा केस आ चुके हैं। भारत भी इसके एक-दो केस मिल चुके हैं। कर्नाटक में मास्क की वापसी हो गई है। ऐसे में लोकल सर्कल्स का यह सर्वे बताता है कि कोविड के लक्षणों के बावजूद भी लोग इसका टेस्ट कराने से बचते हैं।
क्या कहती है सर्वे की रिपोर्ट
सर्वे के अनुसार 9 में से एक भारतीय ने ही माना कि उसके परिवार में कोविड का लक्षण होने पर उसने RT-PCR टेस्ट करवाया। यह नया वेरिएंट काफी संक्रामक है। बीमार बुजुर्गों में इसका संक्रमण गंभीर हो सकता है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि जिन देशों में इसका संक्रमण ज्यादा हो रहा है, वहां से आने वाले यात्रियों का टेस्ट जरूरी बनाएं। साथ ही, हर जिले में दो-तीन केंद्रों पर मुफ्त टेस्ट का इंतजाम भी करें।
2023 में जब परिजनों को कोविड के लक्षण दिखे तो किस तरह का टेस्ट करवाया
- 76% ने कहा कोई टेस्ट नहीं
- 12% ने RT-PCR टेस्ट करवाया
- 6% ने रैपिड एंटीजन टेस्ट किया
- 6% ने कहा- कह नहीं सकते
- लक्षणों के बावजूद आखिर RT-PCR टेस्ट क्यों नहीं करवाया?
- 7% ने कहा, यह महंगा है
- 7% ने कहा, पहले के टेस्ट में रिजल्ट सही नहीं रहा
- 7% ने कहा, यह असुविधाजनक है
- 100% ने कहा, बस लक्षणों वाला इलाज किया और ठीक हो गए।
‘कोविड से बचाव की सावधानी अपनना ज़रूरी’
देश में फैल रहे कोरोना के इस नए वैरिएंट को देखते हुए डॉक्टर जुगल ने लोगों से सावधानी बरतने को कहा है। अगर किसी को खांसी-जुकाम होता है तो वह कोविड की जांच नहीं कराता है। निमोनिया होने पर जब वह भर्ती होता है, तब डॉक्टर जांच कराता है। कोविड की जांच में तो केवल संक्रमण की पुष्टि होती है। नए वेरिएंट का पता जीनोम सीक्वेंसिंग से होता है। मुद्दा यह है कि पूरे इंडिया में यह सिक्वेंसिंग नहीं होती है। अब नए वेरिएंट की पहचान हुई है, तो सबसे पहले यह देखा जाएगा कि यह कितना संक्रमण करता है।

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