रायपुर
मरवाही वनमंडल में अनियमितता मामले पर विधानसभा में बुधवार को जमकर बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने पूछ लिया कि वनमंडल में 40 करोड़ की धोखाधड़ी हुई है, और चार साल में जांच पूरी नहीं हो पाई है। इस असाधारण विलंब के पीछे पूर्व सीएम या वर्तमान सीएम, किसकी मेहरबानी है? इस पर वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि अनियमितताओं के कुल 79 प्रकरण आए हैं। 7 प्रकरणों की जांच पूरी हो गई है। इसमें 35 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ जांच संस्थित किया गया है।
नेता प्रतिपक्ष के सवाल के जवाब में वनमंत्री ने माना कि मरवाही वनमंडल में अनियमितताओं की जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि निष्फल व्ययों के कारण सरकार को हुई आर्थिक क्षति की पूर्ति के लिए दोषी पाए गए अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार वसूली की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जांच में तेजी नहीं दिख रही है। वर्ष 2020 में यह कहा गया था कि 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर ली जाएगी। लेकिन जांच अब तक पूरी नहीं हुई। डॉ महंत ने आगे कहा कि आदिवासी इलाके मरवाही में कुछ काम नहीं हुआ है। मनरेगा के स्वीकृत काम अब तक पूरे नहीं हुए हैं। वनमंत्री ने कहा कि अध्यक्ष रहते आप इस मामले को कई बार उठवा चुके हैं। हम जांच को जल्द से जल्द पूरा कराएंगे।

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