नई दिल्ली
अनुसंधानकर्ताओं ने जर्मनी के एक व्यक्ति की जांच की जिसने कोविड-19 टीके की 217 खुराक लेने का दावा किया था। अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि उसकी प्रतिरोधक प्रणाली पूरी तरह से सक्रिय है।
अब तक, यह स्पष्ट नहीं है कि इस तरह के अति टीकाकरण का प्रतिरक्षा प्रणाली पर क्या प्रभाव पड़ता है। कुछ वैज्ञानिकों की राय थी कि एंटीजन की आदत पड़ने के बाद प्रतिरक्षा कोशिकाएं कम प्रभावी हो जाएंगी।
हालांकि, द लांसेट इंफेक्शियस डिजीज नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह सक्रिय है।
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि जर्मनी में छह करोड़ से अधिक लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए टीका लगाया गया है, जिनमें से कई लोगों ने टीके की कई खुराक ली हैं।
जर्मनी में फ्रेडरिक-एलेक्जेंडर विश्वविद्यालय एर्लांगेन-नर्नबर्ग (एफएयू) की एक टीम द्वारा जांच किए गए व्यक्ति ने निजी कारणों से टीके की 217 खुराक लगवाने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि इनमें से टीके की 134 खुराक लगवाने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है।
एफएयू के किलियन शॉबर ने कहा, ''हमें उनके मामले के बारे में अखबार से पता चला।''
उन्होंने कहा, ''फिर हमने उनसे संपर्क किया और उन्हें एर्लांगेन (जर्मनी का एक शहर) में विभिन्न परीक्षण कराने के लिए आमंत्रित किया जिसमें उन्होंने बहुत दिलचस्पी दिखाई।''
टीकाकरण में रोगाणु के कुछ हिस्से शरीर में पहुंचाए जाते हैं या एक प्रकार की निर्माण योजना होती है जिसका उपयोग टीका लगाने वाले व्यक्ति की कोशिकाएं इन रोगजनक घटकों का उत्पादन करने के लिए कर सकती हैं।
अनुसंधानकर्ता यह विश्लेषण करना चाहते थे कि यदि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली एक विशिष्ट एंटीजन के संपर्क में कई बार आती है तो क्या होता है।
शॉबर ने बताया, ‘एचआईवी या हेपेटाइटिस बी जैसे पुराने संक्रमण में ऐसा हो सकता है, जो नियमित रूप से उभर सकते हैं।''
शॉबर ने कहा, ‘अध्ययन के दौरान जब व्यक्ति को उसके आग्रह पर टीके की और खुराक दी गई तो हमने स्वयं रक्त के नमूने लिए। हम इन नमूनों का उपयोग यह निर्धारित करने में कर सकते थे कि प्रतिरक्षा प्रणाली टीकाकरण पर कैसे प्रतिक्रिया करती है।’
जांच के नतीजों से पता चला कि व्यक्ति के शरीर में बड़ी संख्या में सीओवी-2 विरुद्ध 'टी-प्रभावी कोशिकाएं हैं। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा, ये शरीर के अपने सैनिकों के रूप में कार्य करते हैं जो वायरस से लड़ते हैं।
अनुसंधानपत्र के प्रमुख लेखकों में से एक कैथरीना कोचर ने बताया कि जांच में पता चला कि बीमारी को याद रखने वाली कोशिकाओं की संख्या नियंत्रण समूह से अधिक थी।

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