गरियाबंद
विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान करवाकर लौट रही पोलिंग पार्टी को नक्सलियों ने निशाना बनाया था। मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुरुवार को मैनपुर से 12 किमी दूर बड़े गोबरा गांव में दबिश दी। 8 जगहों पर छापेमारी कर पूर्व सरपंच समेत 6 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
NIA की टीमों ने मामले में अपनी जांच के तहत गांव बड़ेगोबरा, पीएस मैनपुर, जिला गरियाबंद के नक्सल प्रभावित इलाके में छह संदिग्धों के परिसरों पर व्यापक तलाशी ली। प्रतिबंधित सीपीआइ (माओवादी) संगठन के मैनपुर-नुआपाड़ा डिवीजन के ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू)/समर्थकों के रूप में काम करने वाले संदिग्धों के परिसरों से तलाशी के दौरान कई मोबाइल फोन और 2,98,000 रुपये नकद जब्त किए गए।
बता दें कि 17 नवंबर को मतदान दल घोर नक्सली प्रभावित इलाकों में मतदान करवाकर वापस लौट रहा था। इसी बीच बड़े गोबरा के पास नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट कर पोलिंग पार्टी को निशाना बनाने की कोशिश की। घटना में भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) का एक जवान जोगिंदर सिंह शहीद हो गए थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस साल जिन तीन सुरक्षाकर्मियों की हत्या की जांच की फाइल एनआईए को सौंपी है, उसमें शहीद जोगिंदर सिंह का केस भी शामिल है।
एनआईए ने इसी सिलसिले में गुरुवार सुबह 8 बजे बड़े गोबरा में दबिश दी। यहां सबसे पहले पूर्व सरपंच भूपेंद्र यादव को पकड़ा गया। इसके बाद लगातार लखन यादव, मोहन यादव और सत्येंद्र यादव के घर दबिश दी गई। गांव में छापामार कार्रवाई दोपहर 1.30 बजे तक चली। इसके बाद एनआईए चारों हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए ले गई है। फिलहाल घटना में पकड़े गए लोगों की भूमिका स्पष्ट नहीं की गई है। परिवारवालों के पूछने पर टीम ने उनसे कहा कि बस पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं। जांच में सब सही निकलेगा तो छोड़ देंगे।

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