नई दिल्ली
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में लड़ने के लिए रूसी सेना द्वारा भारतीय नागरिकों की भर्ती पर सत्यापित रोक लगाने की मांग की है, जबकि 10 भारतीयों को रिहा किया गया है और देश वापस भेज दिया गया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में सवालों का जवाब देते हुए कहा, “हमने इस मुद्दे को फिर से उठाया है, और हम प्रक्रिया के साथ लगातार जुड़े हुए हैं। हम यहां और मॉस्को में रूसी अधिकारियों के साथ भी संपर्क में हैं, ताकि रूसी सेना में सेवा दे रहे भारतीयों को रिहा कर जल्द से जल्द भारत वापस भेजा जा सके।”
उन्होंने कहा कि मंत्रालय से अब तक संपर्क करने वाले भारतीयों की संख्या 20-25 है क्योंकि वे रिहा होना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से 10 लोगों को रिहा कर दिया गया है और वापस भारत भेज दिया गया है।
प्रवक्ता ने कहा कि “हाल ही में जिन दो लोगों की मौत हुई है, हम उनके परिवार के सदस्यों के संपर्क में हैं। हम रूसी रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के संपर्क में भी हैं, ताकि जल्द से जल्द उनके पार्थिव शरीर को भारत लाया जा सके।”
उन्होंने कहा कि “हमने भर्ती पर सत्यापित रोक लगाने की मांग की है और इस उम्मीद के साथ रूसी अधिकारियों के समक्ष पूरी ईमानदारी से मुद्दा उठाया है कि वे कार्रवाई करेंगे। यह हमारे लिए अत्यंत चिंता का विषय है और रूसी अधिकारी इस पर जल्द ही कार्रवाई करेंगे।”
इस महीने की शुरुआत में, विदेश मंत्रालय ने कहा था कि रूसी सेना द्वारा भर्ती किए गए दो भारतीय नागरिक मारे गए और इस मामले को रूसी अधिकारियों के साथ दृढ़ता से उठाया गया, साथ ही युद्ध लड़ रहे सभी भारतीयों की शीघ्र रिहाई और प्रत्यावर्तन की मांग की गई।
विदेश मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में एक वक्तव्य में कहा कि इस तरह की गतिविधियां हमारी साझेदारी के अनुरूप नहीं होगी और हम भारतीय नागरिकों से रूस में रोजगार के अवसरों की तलाश करते समय सावधानी बरतने का भी आग्रह करते हैं।

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