नईदिल्ली
करीब एक दशक पहले अस्तित्व में आई आम आदमी पार्टी (आप) ने हाल ही में जहां राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल किया है तो वहीं उसे इन दिनों कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ रहा है। कथित शराब घोटाले में पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता मनीष सिसोदिया जेल चले गए हैं तो 'आप' के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी सीबीआई के सामने पेश होना पड़ा है। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की कोख से जन्मी पार्टी पर करप्शन के आरोपों ने भाजपा को घेराबंदी का मौका दे दिया है। जवाब में 'आप' ने भी अपने कार्यकर्ताओं को सड़कों पर उतार दिया है। इस मुश्किल वक्त में पार्टी उन कार्यकर्ताओं को भी याद कर रही है जो शुरुआती दौर में उससे जुड़े थे लेकिन लंबे समय से खामोश और निष्क्रिय हैं। पार्टी उन वॉलेंटियर्स से संपर्क साध रही है।
पार्टी के एक सूत्र ने कहा, 'हम ऐसे वॉलेंटियर्स से संपर्क कर रहे हैं जो लंबे समय से पार्टी की गतिविधियों में शामिल नहीं हो रहे हैं। उनसे पूछा जाएगा कि आखिर किन वजहों से वह पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय नहीं हैं।' नेता ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों में पार्टी की ओर से आयोजित प्रदर्शन और आयोजनों में कार्यकर्ताओं की संख्या में गिरावट आ रही है।
बताया जा रहा है कि इस प्लान को पार्टी नेतृत्व के साथ साझा किया गया है और जल्द ही इसे मिशन मोड में अंजाम दिया जाएगा। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में आप के एक नेता ने कहा, 'प्लान तैयार किया जा रहा है और टॉप लीडरशिप से चर्चा की गई है। इस पर जल्द काम होने वाला है। भाजपा हमारी सरकार को परेशान कर रही है और एक बार फिर सड़कों पर उतरने की जरूरत है।'इस बीच पार्टी को यह अहसास हुआ है कि बड़ी संख्या में ऐसे वॉलेंटियर्स जो पहले पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय रहते थे, अब कम रुचि दिखा रही है। 'आप' की कोशिश है कि एक बार फिर उन्हें जोड़ा जाए।
यह भी बताया जा रहा है कि पिछले रविवार को अरविंद केजरीवाल की सीबीआई के सामने पेशी से पहले पार्टी ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन का प्लान बनाया था। लेकिन कार्यकर्ताओं का जोश उम्मीद के मुताबिक नहीं था। पार्टी के बड़े और अहम नेता जरूर सड़कों पर रहे लेकिन आम कार्यकर्ताओं की भीड़ नहीं दिखी। पुलिस ने जिन 1300 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया उनमें से कई पंजाब से आए थे। गौरतलब है कि अन्ना आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में युवा प्रोफेशनल्स और समाज के अलग-अलग तबगों से बड़ी संख्या में लोग वॉलेंटियर्स बने थे। बाद में जब केजरीवाल ने राजनीतिक दल बनाने का ऐलान को तो अधिकतर ने साथ दिया। आप को तीन बार दिल्ली की कुर्सी दिलाने में इनका अहम योगदान रहा है।

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