नई दिल्ली
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कर्नाटक सरकार के राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) खत्म करने के फैसले को राजनीति से प्रेरित करार दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रगति की प्रतीक होनी चाहिए, न कि राजनीतिक मोहरा। प्रधान ने एक्स पर पोस्ट में कहा, 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 खत्म करने के कर्नाटक के मुख्यमंत्री के राजनीति से प्रेरित फैसले के बारे में जानकर निराश हूं। हमारी शिक्षा प्रणाली को विकास की जरूरत है, न कि प्रतिगमन की।
एनईपी वर्षों के विचार-विमर्श का परिणाम थी जो सभी की आकांक्षाओं की दर्शाती है। यह निर्णय कांग्रेस के सुधार विरोधी, भारतीय भाषा विरोधी और कर्नाटक विरोधी चरित्र को उजागर करता है। कर्नाटक ऐसे नेतृत्व का हकदार है जो प्रगति और समावेशिता को महत्व देता हो,न कि क्षुद्र राजनीति को।
सिद्दरमैया जी, आइए छात्रों को पहले रखे और क्षुद्र राजनीति बंद करें!' उल्लेखनीय है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने सोमवार को कहा था कि अगले शैक्षणिक वर्ष से राज्य में एनईपी को खत्म कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री का कहना था कि एनईपी को खत्म करके वह संविधान के मुताबिक शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करेंगे।

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