वह कांग्रेस नेता के मिथ्या आरोप से नहीं डरता
नई दिल्ली। ‘वोट चोरी’ के आरोपों और बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राहुल गांधी और विपक्षी दलों के लगातार विरोध के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने साफ शब्दों में कहा कि वोट चोरी का आरोप झूठा है। चुनाव आयोग पर कंलक लगाया जा रहा है। डबल वोटिंग के आरोप लगाए गए। ऐसे मिथ्या आरोप से चुनाव आयोग नहीं डरता है। चुनाव आयोग निडरता के साथ सभी गरीब अमीर बुजुर्ग महिला और सभी वर्ग के मतदाताओं के साथ चट्टान के साथ खड़ा है और खड़ा रहेगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि वोट चोरी जैसे गलत शब्द का इस्तेमाल करके जनता को गुमराह करने की असफल कोशिश की जाए तो ये भारत के संविधान का अपमान है। उन्होंने कहा कि बिहार के सात करोड़ से ज्यादा मतदाता चुनाव आयोग के साथ खड़े हैं। भ्रम फैलाने की कोशिश हो रही है। चुनाव आयुक्त ने कहा कि पिछले दो दशक से सभी राजनीतिक दल मतदाता सूची में सुधार की मांग करते रहे हैं। इसी मांग को पूरा करने के लिए बिहार से एसआईआर की शुरुआत की गई है। एसआईआर की प्रक्रिया में सभी मतदाता, बीएलओ और सभी राजनीतिक दलों द्वारा नामित बीएलए ने एक प्रारूप सूची तैयार की है। ड्राफ्ट सूची को सभी राजनीतिक दलों के बीएलए ने सत्यापित किया है।
वोट चोरी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कहा कि हमारे लिए न तो कोई पक्ष है, न तो कोई विपक्ष है, सब समकक्ष हैं। हर राजनीतिक दल का जन्म चुनाव आयोग से हुआ है, तो हम उनसे भेदभाव कैसे कर सकते हैं। वोट चोरी का आरोप संविधान का अपमान है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग मतदाताओं के नाम संदेश देना चाहता है कि भारत के संविधान के मुताबिक भारत का कोई भी नागरिक जो 18 साल पूरा कर चुका है उसे मतदाता बनना चाहिए और मतदान करना चाहिए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बार-बार निर्वाचन आयोग पर मतदाता से जुड़े डेटा में हेराफेरी करने का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में ‘वोट चोरी’ हुई है। चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता से उन लोगों के नाम प्रस्तुत करने को कहा है, जिनके बारे में उनका दावा है कि उन्हें मतदाता सूची में गलत तरीके से जोड़ा गया या हटाया गया है। साथ ही एक हस्ताक्षरित घोषणा-पत्र भी प्रस्तुत करने को कहा है। निर्वाचन आयोग ने तो यहां तक कहा है कि अगर राहुल गांधी अपने आरोपों के समर्थन में कोई हलफनामा देने में विफल रहते हैं, तो उन्हें माफी मांगनी होगी।

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