August 31, 2026

दिल्ली SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी, 47.7 लाख नाम बाहर; 30 सितंबर तक दावा करने का मौका

 नई दिल्ली 
 दिल्ली में SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सोमवार को जारी कर दी गई। 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47.7 लाख नाम बाहर कर दिए गए हैं। दिल्ली में कुल 1,45,10,299 मतदाता हैं, लेकिन डोर-टू-डोर अभियान के दौरान 97.5 लाख मतदाताओं के ही गणना फॉर्म जमा और डिजिटाइज हो सके हैं। यह कुल मतदाताओं का करीब 67.18 फीसदी है।

अधिकारियों के मुताबिक, जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होंगे, उन्हें अपना नाम शामिल कराने का मौका दिया जाएगा। इसके लिए 31 अगस्त से 30 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकेंगी। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित होनी है।

नाम बाहर है तो क्या करना होगा?
अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है और आप मतदाता के तौर पर पात्र हैं, तो आपको दावा दाखिल कर नाम शामिल कराने का अनुरोध करना होगा। इसके लिए दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रभावित मतदाता 30 सितंबर तक अपना दावा पेश कर सकते हैं। अधिकारियों की ओर से प्राप्त दावों की जांच की जाएगी और जरूरी वैरिफिकेशन के बाद तय किया जाएगा कि नाम को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाए या नहीं।

कब तक जुड़वा सकते हैं नाम?
नाम शामिल कराने के लिए सबसे अहम तारीख 30 सितंबर 2026 है। इसी दिन दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया समाप्त होगी। इसके बाद चुनाव अधिकारी प्राप्त आवेदनों की जांच करेंगे। नोटिस जारी करने और उनके निस्तारण की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलेगी। पूरी प्रक्रिया के बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।

47.7 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर क्यों हुए?
SIR के तहत दिल्ली में घर-घर जाकर मतदाताओं के गणना फॉर्म जमा कराए गए थे। इनमें से करीब 97.5 लाख मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त हुए और उन्हें डिजिटाइज किया गया। यह दिल्ली के कुल मतदाताओं का करीब 67.18 फीसदी है। वहीं, करीब 47.7 लाख मतदाताओं के फॉर्म 'अनकलेक्टेबल' श्रेणी में रखे गए। इनमें Absent, Shifted, Dead, Duplicate और Others (ASDDO) श्रेणियां शामिल हैं। इन मतदाताओं के नाम इसलिए ड्राफ्ट रोल में नहीं आए हैं।

70 विधानसभा क्षेत्रों में अलग रहा SIR का असर
घर-घर चलाए गए इस अभियान के दौरान फॉर्म के डिजिटाइजेशन की दर सभी विधानसभा क्षेत्रों में एक जैसी नहीं रही। रोहिणी में सबसे ज्यादा 83.43 फीसदी फॉर्म डिजिटाइज हुए, जबकि तुगलकाबाद में यह दर 52.15 फीसदी रही। इसका मतलब है कि अलग-अलग इलाकों में मतदाताओं के फॉर्म जमा होने और डिजिटाइज होने की स्थिति में काफी अंतर रहा।