नई दिल्ली
क्रिकेट इतिहास के महान खिलाड़ियों में शुमार और दुनिया के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर सर गारफील्ड सोबर्स अब हमारे बीच नहीं हैं. बारबाडोस में जन्मे सोबर्स ने 1954 से 1974 के बीच वेस्टइंडीज क्रिकेट के लिए कई मैच विनिंग परफॉर्मेंस दी थी. वेस्टइंडीज क्रिकेट का नाम ऊंचा करने में सर गारफील्ड सोबर्स का रोल सबसे अहम रहा है. सर गारफील्ड सोबर्स के निधन की खबर आते ही भारतीय क्रिकेटर्स भी शोक व्यक्त कर रहे हैं.
कोहली ने लिखा दिल छू लेने वाला मैसेज
भारतीय टीम के रनमशीन विराट कोहली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि क्रिकेट ने अपने सबसे महान नायकों में से एक को खो दिया है. सर गारफील्ड सोबर्स आपकी आत्मा को शांति मिले. आपकी विरासत आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी.
सचिन तेंदुलकर ने शेयर की पुरानी यादें
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने एक बेहद भावुक पोस्ट शेयर की. उन्होंने लिखा कि यह मानना बहुत मुश्किल है कि सर गैरी अब हमारे बीच नहीं रहे. साल 2003 वर्ल्ड कप में उनके हाथों प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट की ट्रॉफी लेने से लेकर शतकों के मील के पत्थर पर उनके बधाई संदेश तक, मेरी कई यादें उनसे जुड़ी हैं. कुछ साल पहले लंदन में हमारी आखिरी मुलाकात हुई थी, जहां हमने खेल पर लंबी चर्चा की थी. वह वास्तव में वन एंड ओनली थे. मैं उन्हें बहुत मिस करूंगा.
कपिल देव ने जताया दुख
साल 1983 के विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव ने कहा कि जो भी क्रिकेट को जानता है, वह सर सोबर्स को जरूर जानता है. वे दुनिया के सबसे बेहतरीन क्रिकेटर थे. उनके खेल को देखकर मेरे जैसे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली. भले ही आज वे चले गए हैं, लेकिन उनका हुनर हमेशा जीवित रहेगा. इसके अलावा पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने दुख जताते हुए कहा कि क्रिकेट ने अपना सबसे बड़ा आइकॉन खो दिया है. उनकी दमदार ऑलराउंड प्रदर्शन हमेशा क्रिकेट फैन्स के दिलों में रहेगी.
सुनील गावस्कर का छलका दर्द
सुनील गावस्कर का सर सोबर्स से बेहद करीबी रिश्ता था. साल 1971 में गावस्कर ने जब वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की थी, तब सोबर्स ही विंडीज टीम के कप्तान थे. गावस्कर ने एक्स पर बेहद भावुक नोट लिखते हुए कहा कि भारी मन से मुझे क्रिकेट इतिहास के सबसे महान खिलाड़ी के जाने की खबर मिली है.
आज के ऑलराउंडर जहां दो विभागों में संतुलन बनाते हैं, वहीं सर गैरी अकेले पांच विधाओं के मास्टर थे. वे जादुई बल्लेबाजी करते थे, नई गेंद से तेज-मध्यम गेंदबाजी कर सकते थे, जरूरत पड़ने पर बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स स्पिनर बन जाते थे, रिस्ट स्पिन फेंकते थे और शॉर्ट लेग या स्लिप में चीते की तरह फील्डिंग करते थे. क्रिकेट ने आज अपना सबसे चमकता हीरा खो दिया है.

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