भोपाल
स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के इंजीनियरों के कहने पर यूं तो निगम प्रशासन हर साल जनता के करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रहा है, लेकिन इसके बावजूद स्वच्छता में भोपाल अब तक नंबर वन नहीं बन पाया। 3 साल पहले इंजीनियरों के कहने पर नालों की गंदगी छिपाने के लिए वर्टिकल वॉल प्रोजेक्ट पर 2 करोड़ रुपए फूंके गए थे, लेकिन इस प्रोजेक्ट को एसबीएम के इंजीनियर अब भूल चुके हैं। बीते दो साल से इस प्रोजेक्ट पर कोई काम नहीं हुआ। जिन 165 नालों पर फ्रेम बनाकर पौधे लगाए गए थे। उधर पौधे सूख कर नष्ट हो चुके हैं, गमले गायब हो चुके हैं। अधिकांश जगहों पर अवशेष के रूप में सिर्फ फ्रेम खड़े हुए हैं। इनके बारे में अब जिम्मेदार अफसर सिर्फ पल्ला झाड़ रहे हैं। जबकि उन इंजीनियरों के खिलाफ एक्शन लिया जाना चाहिए था। जिनके इस एक्सपेरिमेंट पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए।
नालों के सामने खड़े फ्रेम, यहां सूखे पौधे
नारियलखेड़ा, लिंक रोड 1, शिवाजी नगर, एमपी नगर, रोशनपुरा, कोलार, होशंगाबाद रोड, गुलमोहर, स्मार्ट सिटी भवन, दस नंबर, आकाशगंगा कॉलोनी आदि क्षेत्रों में वर्टिकल वॉल बनाई गई थी।
इन एजेंसियों ने लगाए थे पौधे
नगर निगम ने वर्टिकल गार्डन बनाने का कांट्रेक्ट अशोक पुरुषवानी को दिया था। शहर की वर्टिकल वॉल में छोटे गमलों में रंग बिरंगे फूल पत्तियों वाले पौधे लगाने का कार्य संजय लैंडस्कैप सोल्यूशंस ने किया। इंजीनियर हबीब उल रहमान के पास मॉनिटरिंग का जिम्मा था।
पौधों के लिए रखे गमले हुए गायब
रवींद्र भवन वर्टिकल गार्डन के अलावा अन्य स्थानों पर भी इनका हाल बुरा है। रखरखाव न होने से अधिकांश जगहों पर वर्टिकल गार्डन के पौधे सूखकर नष्ट हो चुके हैं। जहां फ्रेम खड़े हैं वहां से इनमें लगाए गए गमले गायब हो चुके हैं।
गाइड लाइन आती है तब होता काम
वर्टिकल वॉल को लेकर काम बंद है। गाइडलाइन आती है तब काम शुरू होता है। सर्वेक्षण का काम अभी शुरू नहीं हुआ है। यह 15 फरवरी के बाद शुरू हो सकता है।
आरके सक्सेना, चीफ सिटी इंजीनियर, बीएमसी

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