भोपाल
अधिक भुगतान वसूली के विरुद्ध मप्र के 25000 से अधिक शासकीय सेवकों ने माननीय उच्च न्यायालय में प्रकरण दर्ज करवायें हैं जिसमें 2000 करोड़ की राशि दांव पर लगी है। और ऐसे प्रकरणों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। शासन और कर्मचारियों की इस समस्या की जड़ है.
गलत वेतन निर्धारण और त्रुटिपूर्ण शासनादेश
भविष्य में गलत वेतन निर्धारण से कैसे बचें और सही वेतन निर्धारण कैसे करें। इस विषय पर वेतन निर्धारण नियम पुस्तक के लेखक वित्तीय विशेषज्ञ डॉ अजित बाबू जैन द्वारा इस विकराल समस्या के समाधान का संकल्प लिया है।
उन्होंने शासन के समस्त विभागों में वेतन निर्धारण में संलग्न अनुसचिवीय कर्मचारियों को प्रशिक्षण कार्यशाला के माध्यम से सही वेतन निर्धारण के लिए प्रशिक्षित करने हेतु अपनी सेवाएं अर्पित की हैं।
डॉ अजित बाबू जैन ने बताया कि भविष्य में ऐसे प्रकरण और दायर न हों उसे रोकने का उपाय यही है कि सही वेतन निर्धारण करने हेतु जिम्मेदार कर्मचारियों को वेतन निर्धारण नियमो का प्रशिक्षण दिया जाकर उन्हें पूरी तरह प्रशिक्षित किया जाए । तथा कोई भी ऐसा शासनादेश जारी होने से रोका जाए जो त्रुटिपूर्ण हो । क्यों कि ऐसे त्रुटिपूर्ण शासनादेश ही विवाद का कारण हैं।
डॉ अजित बाबू जैन विगत चार वर्षों से इस पुनीत कार्य में अपना योगदान देकर अनुसचिवीय कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि भविष्य में अब और ऐसे प्रकरण दर्ज न हो सके , इस दिशा में वे निरंतर कार्य करते रहेंगे । उज्जैन सम्भाग अन्तर्गत आने वाले सभी जिलों के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देते हुए वित्तीय विशेषज्ञ
डॉ अजित बाबू जैन

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