कहीं यूपी में संगठन और सरकार में बड़े बदलाव की आहट तो नहीं
नई दिल्ली। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के रविवार को अचानक दिल्ली पहुंचे और वहां पीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। उनकी इन मुलाकातों ने राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। इनमें सबसे लंबी बातचीत जेपी नड्डा के साथ करीब एक घंटे तक चली, जिससे कई राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आधिकारिक तौर पर बताया गया कि पीएम मोदी से योगी की मुलाकात जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन को लेकर थी, जो अक्टूबर में होना है, लेकिन यह मुलाकातें सिर्फ शिष्टाचार मानी जाती, अगर इससे पहले दोनों डिप्टी सीएम की दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से अलग-अलग मुलाकातें न हुई होतीं। इससे साफ है कि मुलाकातें सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि इसके पीछे गंभीर संगठनात्मक और राजनीतिक कारण हैं।
यूपी में बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति अब अधर में है। यह पद रणनीतिक रूप से बेहद अहम है क्योंकि 2027 में यूपी विधानसभा चुनाव और उससे पहले कई स्थानीय चुनाव हैं। साथ ही संगठन के पुनर्गठन की चर्चा भी तेज है, जिससे चुनावी तैयारी को धार दी जा सके। बीजेपी हाईकमान मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर भी विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन से पार्टी संतुष्ट नहीं है। साथ ही, कुछ पर भ्रष्टाचार या कार्यशैली को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। जेपी नड्डा से मुलाकात में योगी ने संभावित नए चेहरों और मौजूदा मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर चर्चा की ऐसा माना जा रहा है।
बता दें अनुप्रिया पटेल, संजय निषाद, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, जैसे नेताओं की नाराजगी अब खुलकर सामने आ रही है। अफसरशाही से लेकर संगठन में उपेक्षा तक, कई सहयोगी मीडिया में बयानबाजी कर चुके हैं। वहीं, ओबीसी और दलित वोट बैंक में बीजेपी की पकड़ कमजोर पड़ी है, खासकर 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद। इस पृष्ठभूमि में शीर्ष नेतृत्व के साथ यह चर्चा जरूरी हो गई थी कि इन नाराज वर्गों को कैसे फिर से जोड़ा जाए।
दिल्ली दौरे में सीएम योगी के हाथ में एक फाइल नजर आई, जिसे वे पीएम मोदी से मुलाकात के समय हाथ में लिए थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसमें कई मुद्दों जैसे प्रशासनिक सुधार, बजट, परियोजनाओं की मंजूरी, सहयोगी दलों की रिपोर्ट आदि शामिल हो सकती है। योगी का यह दौरा संकेत दे रहा है कि यूपी में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बड़े बदलाव हो सकते हैं। हालांकि ये बदलाव कब और कैसे होंगे, इस पर पार्टी चुप है, लेकिन इतना तय है कि बीजेपी अब 2027 की तैयारी में कोई ढील नहीं बरतना चाहती है।

More Stories
8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में ₹51,000 तक का उछाल! अगर मान ली गई यह बड़ी मांग
पिघलते ग्लेशियर, बेकाबू गर्मी और बाढ़ का खतरा! क्या जलवायु संकट की चौखट पर खड़ा है भारत?
Telegram पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, Meta और X के लिए भी बड़ा संदेश; सरकार के अधिकारों पर लगी मुहर