नई दिल्ली
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने व्यय विभाग के अंतर्गत आठवें केंद्रीय वेतन आयोग में दो अधिकारियों – स्मिता मोल एम एस और अंबिका आनंद की नियुक्ति को लेटरल ट्रांसफर के आधार पर मंजूरी दे दी है।
स्मिता मोल एम एस, फिलहाल नागरिक उड्डयन मंत्रालय में उप सचिव के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें 8वें CPC में उप सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, अंबिका आनंद, इस्पात मंत्रालय में वर्तमान में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं, उन्हें 8वें सीपीसी में निदेशक नियुक्त किया गया है।
क्या होगा दोनों अधिकारियों का कार्यकाल
स्मिता मोल एम एस का कार्यकाल आयोग के साथ ही समाप्त हो जाएगा और इसे 14 अप्रैल, 2029 तक बढ़ाया जा सकता है, जो केंद्रीय कर्मचारी योजना के तहत उनके चार साल के कार्यकाल की शेष अवधि के बराबर है, या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो।
वहीं, अंबिका आनंद का कार्यकाल भी आयोग के साथ ही समाप्त होगा और केंद्रीय कर्मचारी योजना के तहत उनके स्वीकार्य पांच वर्षीय कार्यकाल की शेष अवधि के अनुरूप, 13 अक्टूबर, 2030 तक या अगले आदेश तक बढ़ाया जा सकता है।
इन नियुक्तियों से पहले, सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग में दो वरिष्ठ अधिकारियों को संयुक्त सचिव के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दी थी। इनमें अमित सतीजा (आईएएस) और नीरज कुमार गयागी (आईडीएएस) को व्यय विभाग के अधीन कार्यरत आयोग में संयुक्त सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था।
इससे पहले खबर आई थी कि नेशनल काउंसिल की स्टाफ साइड ने आयोग को अपना 51 पेज का मेमोरेंडम तय समय से पहले भेज दिया है। जेसीएम के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि, "कर्मचारियों की जरूरतों और बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए कई अहम प्रस्ताव दिए गए हैं।"
सैलरी-एरियर की ये है डिटेल
केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार है। यह वेतन आयोग 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। सिफारिशों के लागू होने से पहले वेतन आयोग से जुड़ी कुछ ऐसी बातें हैं जो केंद्रीय कर्मचारियों को जान लेना जरूरी है। उदाहरण के लिए यह जानना जरूरी है कि कितने केंद्रीय कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। इसके अलावा, सैलरी और एरियर को वेतन आयोग कैसे निर्धारित करते हैं।
8वें वेतन के बारे में
दरअसल, केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन को संशोधित करने के लिए हर 10 साल में गठित किया जाता है। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इसके सदस्यों में प्रोफेसर पुलक घोष और पंकज जैन शामिल हैं। वेतन आयोग विभिन्न मंत्रालयों, कर्मचारी संघों, पेंशनभोगियों और अन्य संबंधित पक्षों से विचार और सुझाव इकट्ठा करता है। ये सुझाव इकट्ठा हो जाने के बाद वेतन आयोग सैलरी स्ट्रक्चर, पेंशन फॉर्मूलों और भत्तों के पैटर्न का विश्लेषण और अध्ययन करता है और उसके बाद ही अंतिम सिफारिशें देता है।
वेतन आयोग का कब गठन हुआ?
बता दें कि 8वें वेतन आयोग की घोषणा पिछले साल जनवरी महीने में की गई थी। इसके लिए संदर्भ की शर्तें (ToR) पिछले साल नवंबर में जारी की गई थीं। तब से ही सैलरी ग्रोथ, बकाया, संशोधनों और पेंशन स्ट्रक्चर में प्रस्तावित बदलावों के लागू होने को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बीच, वेतन आयोग के पास अपनी सिफारिशें जमा करने के लिए कुल 18 महीने का समय है।
बता दें कि 7वें वेतन आयोग को बनने से लेकर लागू होने तक 2.5 साल लगे और 6वें वेतन आयोग को 2 साल जबकि 5वें वेतन आयोग को 3.5 साल लगे। बहरहाल, अब वेतन आयोग की 24 अप्रैल 2026 को देहरादून में एक बैठक भी होने वाली है।
फिटमैंट फैक्टर की अहम भूमिका
वेतन आयोग वेतन को लेकर जो भी सिफारिशें करेगा उसमें फिटमैंट फैक्टर की अहम भूमिका होगी। फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा मल्टीप्लायर है जो पुरानी बेसिक पे को नई (संशोधित) बेसिक पे में बदलता है। इस मामले में फैक्टर जितना ज्यादा होगा सैलरी और पेंशन में उतनी ही अधिक बढ़ोतरी होगी। इसका असर प्रोविडेंट फंड में किए जाने वाले योगदान, ग्रेच्युटी से जुड़ी गणनाओं और बेसिक पे से जुड़े रिटायरमेंट के अन्य लाभों पर भी पड़ता है।
आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का फायदा केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख रिटायर्ड पेंशनभोगियों को मिलने की उम्मीद है। कहने का मतलब है कि एक करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। बता दें कि वेतन आयोग की सिफारिशें एक जनवरी 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है। कहने का मतलब है कि केंद्र सरकार के इन कर्मचारियों को एरियर के तौर पर मोटी रकम मिल सकती है।

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