नई दिल्ली
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उल्फा के वार्ता समर्थक गुट के साथ चल रही बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में विधानसभा और संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन के बाद मूल निवासियों की पहचान की सुरक्षा के लिए समूह की एक मांग पूरी हो गई है।
परेश बरुआ के नेतृत्व वाले उल्फा के कट्टरपंथी गुट को बातचीत की मेज पर लाने की संभावना पर सरमा ने उम्मीद जताई कि देर-सबेर एक दिन यह गुट भी सरकार की बातों को स्वीकार करेगा। उल्फा के एक प्रतिनिधिमंडल ने पिछले हफ्ते गृह मंत्रालय और खुफिया ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की थी।
इस बातचीत में उल्फा के चेयरमैन अरबिंद राजखोवा, महासचिव अनुप चेतिया, नेता राजू बरुआ और साशा चौधरी शामिल थे। उल्लेखनीय है कि, उल्फा का गठन 1979 में संप्रभु असम की मांग के साथ किया गया था। तभी से यह संगठन उग्रवादी गतिविधियों में शामिल रहा है जिसके कारण केंद्र सरकार ने 1990 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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