नई दिल्ली
लोकसभा चुनाव के लिए देश के लगभग हर बूथ पर चाक-चौबंद रणनीति बना रही भाजपा ने वहां के मतदाताओं से प्रभावी संपर्क के लिए नई सामाजिक रणनीति को अपनाया है। इसमें वह चार जातियों महिला, युवा, गरीब एवं किसान को केंद्र में रखकर संवाद कर रही है। इससे भाजपा उन सामाजिक वर्गों तक भी प्रभावी संपर्क बना सकेगी जिनका अधिकांश समर्थन उसके विरोधी दलों को मिलता है। इसमें मुस्लिम समुदाय भी शामिल है।
देश की राजनीति में जाति एक बड़ा कारक है और विपक्ष इसी पर अपनी संभावित एकता को लेकर भाजपा से दो-दो हाथ करने की तैयारी में है। दूसरी तरफ भाजपा ने भी विपक्ष की इस रणनीति की धार कुंद करने के लिए नया जातीय फॉर्मूला तैयार किया है। बीते दिनों देश के प्रमुख 300 कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में भाजपा नेतृत्व ने यह स्पष्ट भी किया है। इसमें कहा गया कि मोदी सरकार की विभिन्न योजनाओं के केंद्र में कोई एक समुदाय और जाति नहीं है, बल्कि वह चार जातियों महिला, युवा, गरीब एवं किसान को केंद्र में रखकर बनाई गई हैं। इसे हर व्यक्ति को बताना है और हर घर तक पहुंचाना है।
राम मंदिर के माहौल में भाजपा के लिए भले ही कोई बड़ी चुनावी चुनौती नहीं दिख रही हो, लेकिन भाजपा हर चुनाव की तरह ही इस चुनाव को भी पूरी ताकत से लड़ रही है। पार्टी के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि हम विपक्ष को कमजोर नहीं मानते हैं।
दरअसल, इस बात का खतरा तो बना ही हुआ है कि सभी सीटों पर भले ही विपक्षी एकता न हो लेकिन जिन सीटों पर वह होगी, वहां पर सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में करने के लिए भाजपा को भी जबाबी सामाजिक कार्ड ही खेलना होगा। इसमें भाजपा की चार जातियों की रणनीति और राम मंदिर से बना माहौल ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

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