मुंबई
छठ पर्व के मौके पर ट्रेनों में लगभग सभी सीटें फुल हो चुकी हैं। लोग घर आने के लिए वेटिंग में टिकट लेने पर मजबूर हो रहे हैं। इधर बिहार पटना आने वाली कई फ्लाइट के रेट्स में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है। फ्लाइट के जरिए दिल्ली से पटना जाना दिल्ली से दुबई जाने से महंगा हो गया है। इसके चलते कई लोग छठ पर अपने घर आकर पर्व मनाने से चूक सकते हैं।
पटना के रहने वाले और दिल्ली में पढ़ाई करने वाले रवि सुमन इस साल घर पर छठ मनाना चाहते थे। लेकिन, अब उन्हें लग रहा है कि वो छठ पर घर जाने से चूक जाएंगे। छठ के दौरान घरेलू उड़ान टिकटों की आसमान छूती कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। दिल्ली से पटना के लिए फ्लाइट्स टिकट की कीमत करीब 25 हजार रुपये तक पहुंच गई है। जबकि मुंबई से पटना के लिए एक तरफा टिकट की कीमत 30 हजार रुपये तक हो गई है।
ट्रेन में कंफर्म टिकट मिलना बहुत कठिन है। इसलिए, हम कभी-कभी घर वापस जाने के लिए फ्लाइट्स से सफर करते हैं। लेकिन, इस बार टिकट पहले की तुलना में बहुत महंगी है। इसलिए मैं इस साल छठ पूजा के लिए घर नहीं जा पाऊंगा।
17 से 20 नवंबर के बीच मनाया जाएगा छठ
बिहार के हजारों लोग दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे दूर-दराज के महानगरों में रहते हैं। जब साल में बिहार का सबसे बड़ा त्योहार छठ आता है तो वे घर वापस जाने की उम्मीद करते हैं। इस वर्ष, यह 17 से 20 नवंबर के बीच मनाया जाएगा। हालांकि, ज्यादा मांग के चलते आसमान छूते हवाई किराए की वजह से कई लोगों को यात्रा करना मुश्किल हो रहा है।
किराए में हर दिन हो रहा इजाफा
विभिन्न एयरलाइनों की वेबसाइटों और बुकिंग साइट्स के अनुसार, 16 और 17 नवंबर को दिल्ली से पटना के लिए उड़ान टिकट की कीमत 22,000 रुपये तक और 18 नवंबर को खरना के दिन 24,000 रुपये तक थी।
16 नवंबर को स्पाइसजेट जैसी बजट एयरलाइन के टिकटों की कीमत 14,000 रुपये से अधिक थी। मुंबई से उड़ानों की कीमत 20,000 रुपये तक और बेंगलुरु से 15,000 रुपये तक है। पटना से वापसी उड़ानों की लागत और भी अधिक हो सकती है, क्योंकि मुंबई की एक उड़ान की कीमत 30,000 रुपये से अधिक है।

More Stories
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा दावा, 3 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन और ₹50,000 करोड़ निर्यात का लक्ष्य समय से पहले होगा पूरा
8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में ₹51,000 तक का उछाल! अगर मान ली गई यह बड़ी मांग
पिघलते ग्लेशियर, बेकाबू गर्मी और बाढ़ का खतरा! क्या जलवायु संकट की चौखट पर खड़ा है भारत?