रायपुर
छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी कलेक्टर कार्यालय रायपुर आमजनों के विभिन्न समस्याओं एवं कार्यों के संपादन का मुख्य शासकीय केंद्र है। नवंबर में विधानसभा चुनाव है। इसके पूर्व पार्किंग ठेकेदार व ट्रैफिक पुलिस की जोड़ी बनकर आम जनता को अपना वाहन लेकर कलेक्ट्रेट में प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं। वहीं कार्यालय के कर्मचारी वाहन पार्किंग में रखने और उसके बाद आने के कारण विलंब से कार्यालय पहुंच रहे हैं। दूसरी ओर 10 बजे कार्यालय पहुंचने के लिए प्रशासनिक दबाव है।
कर्मचारी नेता विजय कुमार झा ने कहा है कि कलेक्टर कार्यालय जनता की समस्याओं के निदान का मंदिर है। जनता कार्यालय प्रवेश करने के पूर्व पार्किंग में बढ़ोतरी दिए बिना अपने काम के लिए कार्यालय के भीतर नहीं जा पा रहे है। गरीब जनता परेशान हैं। रायपुर ट्रैफिक पुलिस इतना खाली है कि बकायदा कलेक्ट्रेट के गेट में टेंट लगाकर ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था एवं वाहन में अलाउंस कर लोगों का प्रवेश वर्जित कर रहे हैं। झा ने आरोप लगाया है कि यही पार्किंग में बकरीद के दिन बकरा काटने वालों को किस प्रकार सरकार द्वारा संरक्षण देकर कर्मचारी नेता के ऊपर झूठा आरोप लगाया गया था। मुख्यमंत्री से झा ने मांग करते हुए कहा है कि चुनाव के पूर्व जनसाधारण को प्रशासन से मिलने के लिए वंचित न किया जाए। क्योंकि आप स्वयं भेंट मुलाकात के लिए सब जगह जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ का दुर्भाग्य है कि ट्रैफिक में भ्रष्टाचार कर ट्रैफिक के अधिकारी जनता के खून पसीने की कमाई को चूस कर, विधायक बनते हैं?।
पूर्ववर्ती सरकार में भी यातायात के अधिकारी विधायक बने थे। आज भी यातायात के अधिकारी विधायक हैं। क्या भविष्य में भी जनता से कर्मचारी से वसूली कर विधायक बनने के लिए फंड तैयार किया जा रहा है। यह जांच का विषय है। विशेषकर कार्यालयीन कर्मचारियों को कार्यालय के भीतर निशुल्क प्रवेश दिया जाना चाहिए। अधिकारियों के वाहन सीधे प्रवेश करते हैं और कर्मचारियों को वंचित रखा जाता है। भारतीय संविधान के समता के आंगन में विषमता के बीज कलेक्टर कार्यालय में नहीं बोए जाने चाहिए। क्योंकि भारत का संविधान कानून के समक्ष समानता के अधिकार की बात करती है।

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