कराची
पड़ोसी देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्ता नाजुक दौर से गुजर रही है. पाकिस्तान में छाए आर्थिक संकट कका जिम्मेदार चीन को माना जा रहा है. 2023 तक पाकिस्तान पर करीब 125 बिलियन अमेरिकी डॉलर का कर्जा है. इसमें से एक तिहाई कर्ज तो केवल चीन ने का है. चीन पहले भी कई देशों को कर्ज देने के बहाने उनकी जमीन हड़पने का काम कर चुका है.
पाक के विदेश मंत्री का बयान
पाकिस्तान की कार्यवाहक वित्त मंत्री शमशाद अख्तर ने कहा कि सुधार के बावजूद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था नाजुक बनी हुई है. नकदी संकट से जूझ रहे देश को कुछ समय के लिए IMF से और अधिक कर्ज लेना होगा. अख्तर ने कहा कि यदि पाकिस्तान में अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है तो बड़े वित्तीय सुधार करने की आवश्यकता है. देश इसके बिना नहीं बचेगा. संभवतः हमें एक और ईएफएफ (विस्तारित फंड सुविधा) चाहिए होगी. हम आईएमएफ के साथ बने रहेंगे.
चीन की ब्याज दरें
चीन द्वारा पाकिस्तान में चलाए जा रहे CPEC प्रोजेक्ट की लागत करीब 25 बिलियन अमेरिकी डॉलर है. पाक को चीन से मिले कर्ज की ब्याज दरें 7 प्रतिशत से अधिक हैं. जबकि IMF 2 प्रतिशत पर ब्याज देता है. चीन की ब्याज दरें आईएमएफ जैसे उधारदाताओं मुकाबले कहीं ज्यादा हैं.
श्रीलंका बन चुका चीन अक शिकार
चीन हमेशा से ही 'कर्ज देकर जमीन हड़पने' की नीति पर काम करता रहा है. श्रीलंका चीन के कर्ज तले इतना दब गया कि उसने हंबनटोटा बंदरगाह को 99 साल की लीज पर चीन को दे दिया.

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