चंडीगढ़
दिवाली से पहले पंजाब की भगवंत मान सरकार ने रोडवेज कर्मियों की सैलरी में बढ़ोत्तरी का ऐलान कर दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद यूनियन ने अपनी हड़ताल स्थगित कर दी है। त्योहारी सीजन से पहले यूनियन के इस कदम से यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। सरकार ने ऐलान किया है कि आउटसोर्स और कान्ट्रैक्ट पर भर्ती हुए ड्राइवर, कंडक्टर और वर्कशॉप कर्मचारियों की सैलरी में पांच फीसदी की बढ़ोत्तरी की जाएगी। यह फैसला 1 अक्टूबर 2023 से लागू होगा।
पंजाब रोडवेज ने कर्मियों के वेतन में 5 फीसदी बढ़ोतरी के बाद पीआरटीसी, पनबस कॉन्ट्रेक्ट यूनियन की हड़ताल का फैसला वापस ले लिया है। सरकार व डायरेक्टर बोर्ड ने उनकी मांग को पूरा करते हुए 1 अक्टूबर 2023 से 5 फीसदी वेतन बढ़ाने का ऐलान किया है। यह वेतन आउटसोर्स और कॉन्ट्रैक्ट पर भर्ती हुए ड्राइवर, कंडक्टर व वर्कशॉप कर्मचारियों को दिया जाएगा। इससे पहले पंजाब रोडवेज पनबस, पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने 9 नवंबर से सरकारी बसों के चक्का-जान का ऐलान किया था। यूनियन के इस फैसले से दिवाली पर घर जाने वाले हज़ारों यात्रियों को राहत मिली है।
मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी थी
यूनियन के राज्य अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने बताया कि हड़ताल की चेतावनी के बाद पनबस में आउटसोर्स एवं अनुबंध आधार पर कार्यरत ड्राइवर, कंडक्टर एवं वर्कशाप स्टाफ के मौजूदा वेतन में एक अक्टूबर से पांच प्रतिशत वार्षिक वृद्धि करने का फैसला लिया गया है। इससे पहले गुरुवार को प्रदेश भर में सभी डिपो बंद रखने और शुक्रवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी थी। सरकार ने उनकी मांग को मान लिया है और इस से संबंधित पत्र जारी कर दिया गया है। जिसके चलते कर्मचारियों ने हड़ताल को स्थगित कर दिया है। सरकारी बसें पहले की तरह ही सड़कों पर दौड़ेंगी।
जून में दो दिन की थी हड़ताल
इस साल रोडवेज कर्मचारियों ने चार महीनों में तीसरी बार हड़ताल करने की चेतावनी दी। इससे पहले जून में रोडवेज कर्मचारियों ने दो दिन हड़ताल भी की थी। जिसके चलते आम लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा था। फिर 15 अगस्त के दिन फिर रोडवेज यूनियन ने हड़ताल का फैसला लिया था लेकिन तब मुख्य मंत्री के साथ पैनल मीटिंग के भरोसा मिलने के बाद से स्थगित कर दिया गया। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में विभाग में 10 साल से कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मचारियों को रेगुलर करने, आउटसोर्सिंग से भर्ती न करने, 6600 ठेका कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से रेगुलर करने और वेतन बढ़ाने जैसी मांगें शामिल हैं।

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