नई दिल्ली.
जिस तरह भारत के पूर्व नेवी अधिकारियों को कतर में मौत की सजा सुनाई गई है। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब कतर में किसी अन्य देश के नागरिकों को ऐसी सख्त सजा दी गई है। करीब नौ साल पहले फिलीपींस के तीन नागरिकों को भी खतरनाक सजा सुनाई थी। इनमें से दो नागरिकों को आजीवन कारावास और एक को सजा-ए-मौत हुई थी। हालांकि बाद में इन सजा में कमी की गई थी।
फिलीपीन्स के इन तीनों नागरिकों में एक कतर जनरल पेट्रोलियम तो दो अन्य कतर एयरफोर्स के लिए जॉब करते थे। इन तीनों फिलीपीन नागरिकों के ऊपर जासूसी का आरोप लगा था। कतर कोर्ट में कहा गया था कि कतर एयरफोर्स के दोनों इंप्लॉयीज कतर पेट्रोलियम में काम करने वाले कर्मचारी के साथ मिलकर जासूसी कर रहे थे। एयरफोर्स में काम करने वाले पेट्रोलियम कर्मचारी को जानकारी देता था। इसके बाद यह जानकारी फिलीपींस सरकार तक पहुंच रही थी। इसके बदले में पैसे का लेनदेन भी रहा था। मामले में पेट्रोलियम कर्मचारी को मौत की सजा सुनाई गई थी। जबकि दो अन्य को आजीवन कारावास की सजा हुई थी।
बाद में क्या हुए बदलाव
आगे चलकर इस मामले की फिर से सुनवाई हुई। इसके बाद आरोपियों की सजा में भी बदलाव हुए। सुनवाई के बाद मौत की सजा को आजीवन कारावास की सजा में बदल दिया गया। इसके अलावा जिन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई थी, उन्हें 15 साल की सजा दे दी गई। फिलीपींस की तरफ से मामले को और आगे ले जाने की बात कही गई थी। लेकिन बाद में ऐसा कुछ हुआ नहीं। अब भारत के लिए उम्मीद यह है कि वह इस मामले को और आगे ले जाए ताकि आठ पूर्व नेवी अफसरों को उचित समय पर राहत मिल सके।
जरूरी कदम उठा रहा भारत
गौरतलब है कि कतर की एक अदालत की ओर से भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों को मौत की सजा सुनाए जाने के एक दिन बाद, भारत फैसले के खिलाफ अदालत में अपील करने समेत विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक मुद्दे का समाधान खोजने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। पता चला है कि भारत को कतर की अदालत के फैसले की प्रति अभी तक नहीं मिली है। अदालत के फैसले पर कतर की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

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