रायपुर
रायगढ़ नगर निगम में भाजपा पार्षदों द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वस्त हो गया। भाजपा को मुंह की खानी पड़ी और उसके एक पार्षद ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया। रायपुर नगर निगम के सभापति एवं पूर्व महापौर प्रमोद दुबे एवं बिरगांव नगर निगम के महापौर नंदलाल देवांगन को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा रायगढ़ नगर निगम के अविश्वास प्रस्ताव हेतु पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था।
वर्तमान में रायगढ़ नगर निगम में कांग्रेस के 26 एवं भाजपा के 21 पार्षद हैं। शुक्रवार 15 सितंबर को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होना था लेकिन भाजपा के 21 लोगों के द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में से 18 लोग ही पहुंच पाए जिसके चलते भाजपा को मुंह की खानी पड़ी। इसके चलते भाजपा द्वारा लाया गया अविश्वासप्रस्ताव गिर गया। रायगढ़ के सभी कांग्रेस पार्षद विधायक प्रकाश नायक, वरिष्ठ नेता मलकीत सिंह गेंदू के नेतृत्व में सीएम हाउस में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलकर शहर के विकास हेतु एकजुट होकर कार्य करने की बात कही।
पर्यवेक्षक प्रमोद दुबे ने बताया कि भाजपा द्वारा लगातार विभिन्न नगरी निकायों में पार्टी के लोगों से बिना विचार विमर्श किए लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव के कारण उन्हीं के दल के लोग उनके ऊपर विश्वास करना बंद कर दिए हैं। अविश्वास प्रस्ताव पर लगातार भाजपा की हार होना इस बात का द्योतक है की छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार लोगों के हित में किस प्रकार सकारात्मक भाव से कार्य कर रही है । इस अवसर पर रायगढ़ के वार्ड क्रमांक 34 की भाजपा पार्षद पुष्पा निरंजन साहू प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के समक्ष कांग्रेस प्रवेश किया। प्रमोद दुबे ने कहा कि भाजपा के पास अविश्वास प्रस्ताव ही एकमात्र अंतिम अस्त्र बचा था जिसमें भी वे असफल हो गए। श्री दुबे ने कहा कि भाजपा की गुटबाजी खुलकर सड़क पर आ गई है और हर जगह दिखाई पड़ रही है। इधर दुबे की रणनीति कारगर रही और पार्टी संगठन ने एक और नगर निगम में विपक्ष को चित्त करने के लिए दुबे की पीठ थपथपाई.

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