अब मकर संक्रांति के बाद होगा मोहन मंत्रिमंडल फेरबदल!

गुजरात माडल होगा लागू, आधा दर्जन मंत्रियों की छुट्टी तय

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार दिसंबर में अपने दो वर्ष पूरे करने जा रही है। 13 दिसंबर 2023 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अब सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के साथ ही मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, मोहन मंत्रिमंडल के पुनर्गठन का खाका लगभग तैयार है। हालांकि, अब मंत्रिमंडल में फेरबदल सूर्यदेव के उत्तरायण होने यानी जनवरी में मकर संक्रांति के बाद ही होने की संभावना है।

भाजपा का शीर्ष नेतृत्व मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर लगातार समीक्षा कर रहा है। इस विषय पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की शीर्ष नेतृत्व से कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में मंत्रियों के प्रदर्शन, संगठन के साथ सामंजस्य और जनता में उनकी छवि पर विस्तार से चर्चा हुई है। इस बार का फेरबदल पूरी तरह ‘परफॉर्मेंस आधारित’ माना जा रहा है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, करीब आधा दर्जन मंत्रियों की छुट्टी लगभग तय मानी जा रही है। इन मंत्रियों के खिलाफ संगठन और जनता दोनों स्तरों पर शिकायतें हैं- खराब कार्यशैली, कामकाज में सुस्ती, जनसंपर्क में कमी और विभागीय लापरवाही जैसे आरोप लगातार सामने आए हैं। पार्टी अब इनकी जगह सक्रिय, ईमानदार और जनसंपर्क में मजबूत चेहरों को लाने पर विचार कर रही है।

गुजरात मॉडल लागू हो सकता है

इस बार मंत्रिमंडल फेरबदल में ‘गुजरात मॉडल’ लागू हो सकता है। यानी मंत्रिमंडल में परफॉर्मेंस, क्षेत्रीय संतुलन और युवा नेतृत्व को प्राथमिकता दी जाएगी। शीर्ष नेतृत्व 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर मध्यप्रदेश में एक नई, ऊर्जावान और संतुलित टीम तैयार करना चाहता है। सूत्रों के अनुसार, इस फेरबदल में कुछ चौंकाने वाले नए नाम शामिल हो सकते हैं, जबकि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। फिलहाल मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित 31 मंत्री हैं। जबकि नियम के अनुसार 35 मंत्रियों की अनुमति है, यानी मंत्रिमंडल में चार पद अभी खाली हैं।

रिपोर्ट कार्ड बनेगा पैमाना

मुख्यमंत्री सचिवालय ने सभी विभागों से दो वर्षों की उपलब्धियों की रिपोर्ट मांगी है। विभागवार ‘रिपोर्ट कार्ड’ तैयार किया जा रहा है, जिसके आधार पर मंत्रियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। दिसंबर के पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री स्वयं मंत्रियों और विधायकों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। सूत्रों के अनुसार, ये बैठकें ही तय करेंगी कि कौन मंत्री अपनी कुर्सी बचा पाएगा और कौन बाहर होगा।

बिहार चुनाव के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव

फिलहाल पार्टी का पूरा ध्यान बिहार विधानसभा चुनाव पर केंद्रित है। ऐसे में भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष अब बिहार चुनाव के बाद ही चुना जाएगा। सूत्रों के अनुसार, अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया फिलहाल टाल दी गई है और यह अब अगले वर्ष जनवरी तक खिसक सकती है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल जून 2024 में समाप्त हो चुका है। वे फिलहाल एक्सटेंशन पर पार्टी का कार्य रहे हैं।