भोपाल। अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक दीपावली इस वर्ष अत्यंत शुभ योगों में मनाई जा रही है। पांच दिनों तक चलने वाला यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा और सामाजिक एकता का भी उज्ज्वल प्रतीक है।
शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली के दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन पर अयोध्यावासियों ने घर-घर दीप प्रज्वलित कर हर्ष व्यक्त किया था। वहीं, वैष्णव परंपरा में यह दिन भगवान विष्णु के नरकासुर वध और देवी लक्ष्मी के प्राकट्य दिवस के रूप में भी पूजनीय है। जैन धर्मावलंबियों के लिए दीपावली भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में विशेष महत्व रखती है, जबकि आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने भी इसी दिन ब्रह्मलोक गमन किया था। इस प्रकार दीपावली धर्म, दर्शन और आत्मजागरण का संगम है।
दीपावली पूजन विधि
दीपावली की संध्या पर लक्ष्मी-गणेश पूजन विशेष फलदायी माना गया है। पूजन से पूर्व घर की साफ-सफाई और सजावट आवश्यक है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि माँ लक्ष्मी स्वच्छ, सुगंधित और प्रकाशमान स्थलों पर ही निवास करती हैं।
-पूजन के लिए उत्तरमुख होकर बैठें और चांदी, तांबे या पीतल के पात्र में जल रखकर संकल्प लें।
-भगवान गणेश की पूजा पहले करें, उसके बाद देवी लक्ष्मी की।
-माँ लक्ष्मी को कमल पुष्प, गुलाब, चावल, सिंदूर, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
-महालक्ष्मी के साथ कुबेर देव की पूजा से धन लाभ के योग बनते हैं।
-पूजा के समय श्रीं महालक्ष्म्यै नम: और गं गणपतये नम: मंत्रों का जप करें।
पूजन के बाद दीपक जलाकर घर के हर कोने में रखें। ऐसा माना जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और समृद्धि का मार्ग खुलता है।
दीपावली पूजन मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष दीपावली 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार) को मनाई जाएगी।
लक्ष्मी पूजन मुहूर्त- शाम 5.47 से रात 7.42 तक (1 घंटा 55 मिनट शुभ काल)
प्रदोष काल- शाम 5.40 से रात 8.10 तक
अमावस्या तिथि- 20 अक्टूबर को सुबह 4.18 से प्रारंभ होकर 21 अक्टूबर को भोर 2.45 तक रहेगी।
शुभ संकेत और परंपरा
मान्यताओं के अनुसार दीपावली की रात दीपदान का विशेष महत्व है। जलाए गए दीपक को मुख्य द्वार, तुलसी चौरा, कूआँ या नदी किनारे रखना शुभ माना जाता है। व्यापारी वर्ग के लिए यह नया वित्तीय वर्ष आरंभ करने का अवसर होता है, इसलिए इस दिन बहीखातों की पूजा (चोपड़ा पूजन) भी की जाती है।

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