बस्ती
जनकपुर से विवाह कर मां जानकी के साथ लौटते समय प्रभु राम ने तीर से रेखा खींची तो जलधारा फूट पड़ी। मान्यताओं के मुताबिक यह जलधारा ही रामरेखा नदी है। महर्षि वशिष्ठ की धरती कहे जाने वाले बस्ती जिले में भगवान राम, मां सीता से जुड़ी बहुत सी मान्यताएं प्रचलित हैं। बस्ती जिले में रामरेखा नदी की उत्पत्ति के बारे में प्रचलित मान्यता महंत दयाशंकर दास बताते हैं।
उनके मुताबिक जब भगवान रामचंद्र मां सीता संग विवाह करके जनकपुर से अयोध्या आ रहे थे तो विक्रमजोत विकास खंड के रामजानकी मार्ग पर मां सीता को प्यास लग गई। इसके बाद भगवान राम ने आने तरकश से एक तीर निकाला और जमीन पर एक रेखा खींच दी। भगवान राम के तीर से खींची गई रेखा से ‘रामरेखा नदी’ की उत्पत्ति हुई थी। इसके बाद मां सीता ने पवित्र रामरेखा नदी से निकले जल से अपनी प्यास बुझाई थी।
महज 16 किमी लंबी रामरेखा नदी को है पुनरोद्धार का इंतजार
इतिहासकार कहते है कि दुनिया की कई प्राचीन सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ था। कभी नदियां लोगों के लिए जीवनदायिनी हुआ करती थीं लेकिन आज इनका ही वजूद खतरे में है। भगवान राम के तीर से उत्पन्न रामरेखा नदी के अस्तित्व पर संकट है। रामरेखा नदी प्रदूषित, जलकुंभियों और जलीय घास से पट गई है। इस वजह से रामरेखा नदी में पानी की काफी कमी है। महंत दयाशंकर दास बताते हैं कि रामरेखा नदी की साफ-सफाई के लिए कोई नहीं सोच रहा है। नदी शैवाल और जलकुंभी से पट गई है। गंदे नालों का पवित्र नदी को प्रदूषित कर दिया है। इसके साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया गया तो जल्द ही नदी विलुप्त हो जाएगी।

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