October 10, 2026

मिर्गी का कारगर उपचार हो सकता है योग-प्राणायाम

नई दिल्ली। मिर्गी के दौरे किसी भी समय अचानक आ सकते हैं, जिसमें व्यक्ति बेहोश हो सकता है। मिर्गी में शरीर में झटके आने लगते हैं या होश में रहते हुए भी असामान्य हरकतें दिखाई दे सकती हैं। हालांकि मिर्गी का उपचार दवाओं के जरिए किया जाता है, लेकिन कई मामलों में मरीज नियमित दवाओं के बावजूद पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाते और उन्हें दौरे आते रहते हैं। ऐसे में योग मिर्गी के उपचार का एक प्रभावी और प्राकृतिक विकल्प हो सकता है, जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को संतुलित करने और तनाव को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। आयुष मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, योग-प्राणायाम का नियमित अभ्यास न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है बल्कि मस्तिष्क की नसों पर सकारात्मक असर डालकर उनकी कार्यक्षमता को भी बेहतर बनाता है। योग विशेषज्ञ बताते हैं कि मिर्गी से पीडि़त लोगों के लिए अनुलोम-विलोम प्राणायाम बेहद लाभकारी है। यह प्राणायाम मस्तिष्क में संतुलन और स्थिरता लाने का कार्य करता है।

आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना 10 से 15 मिनट तक अनुलोम-विलोम करने से मानसिक तनाव घटता है और दौरे की संभावनाएं भी कम हो सकती हैं। इसी तरह कपालभाति प्राणायाम को भी मिर्गी में उपयोगी माना गया है। इसमें तेज गति से सांस को बाहर निकालने और पेट को अंदर खींचने की प्रक्रिया होती है। यह क्रिया मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय कर उनमें ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाती है। नतीजतन नर्वस सिस्टम मजबूत होता है और मानसिक अस्थिरता दूर होती है। साथ ही, यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी मदद करता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। योगासन की बात करें तो ताड़ासन को मिर्गी के मरीजों के लिए खासतौर पर लाभकारी बताया गया है। इस आसन में शरीर पूरी तरह सीधा होता है और हाथों को ऊपर खींचने से रीढ़ की हड्डी में खिंचाव आता है।

इससे न केवल शरीर का संतुलन सुधरता है, बल्कि मानसिक एकाग्रता भी बढ़ती है। सांस लेने और छोडऩे की प्रक्रिया से दिमाग को शांति मिलती है, जिससे मिर्गी के दौरों का खतरा घट सकता है। वहीं, हलासन मस्तिष्क की कोशिकाओं को अधिक सक्रिय करता है। इस योग आसन को करने से सिर की ओर रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे मस्तिष्क का संतुलन और कार्यप्रणाली बेहतर होती है। साथ ही यह पाचन और रीढ़ की हड्डी के लिए भी लाभकारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिर्गी से पीडि़त लोग यदि चिकित्सक की देखरेख में दवाओं के साथ योग अभ्यास को जीवनशैली में शामिल करें तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।