नई दिल्ली। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों में दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) प्रमुख यासीन मलिक ने हाल ही में अदालत में दाखिल एक हलफनामे में कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। मलिक का दावा है कि साल 2011 में उसने दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेताओं के साथ लंबी बैठक की थी। यह बैठक सेंटर फॉर डायलॉग एंड रिकॉन्सिलिएशन नामक थिंक टैंक की मदद से हुई थी। उसका कहना है, यह सोचने वाली बात है कि इतने गंभीर आरोपों वाले व्यक्ति से दूरी बनाने के बजाय, समाज के प्रभावशाली लोग खुलकर संवाद करते रहे।
यासिन मलिक ने अपने हलफनामे में कथित राजनीतिक, धार्मिक और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़ाव का विवरण दिया है। मलिक ने दिल्ली हाई कोर्ट में 25 अगस्त को दाखिल हलफनामे में कहा है कि देश के कई पूर्व प्रधानमंत्रीं, केंद्रीय मंत्रीं, विदेशी राजनयिक और खुफिया एजेंसियों के अधिकारी वर्षों तक उससे बातचीत करते रहे हैं। उसने यहां तक कहा कि दो अलग-अलग मठों के शंकराचार्य कई बार उसके श्रीनगर स्थित घर आए और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ सार्वजनिक रूप से भी वह दिखाई दिया। यासीन मलिक ने यह भी कहा कि तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी उसके प्रयासों के पक्ष में थे और इसी दौरान उसे पहली बार पासपोर्ट मिला। 2001 में जारी हुए इस पासपोर्ट के जरिए वह अमेरिका, ब्रिटेन, सऊदी अरब और पाकिस्तान गया और वहां कश्मीर मुद्दे पर बातचीत के नाम पर उसने अहिंसक लोकतांत्रिक संघर्ष की वकालत की।
हलफनामे में मलिक ने दावा किया है कि वर्ष 2000-01 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा घोषित रामजान सीजफायर में उसकी अहम भूमिका रही। उसने कहा कि दिल्ली में उसकी मुलाकात अजीत डोभाल से हुई। उन्होंने उसे उस समय के खुफिया ब्यूरो प्रमुख श्यामल दत्ता और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा से मिलवाया। मलिक का कहना है कि वाजपेयी के करीबी आरके मिश्रा ने उसे अपने घर बुलाया और ब्रजेश मिश्रा के साथ नाश्ते पर मुलाकात करवाई। इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मौजूद जेकेएलएफ नेताओं और यूनाइटेड जिहाद काउंसिल प्रमुख सैयद सलाउद्दीन से संपर्क साधा। मलिक का दावा है कि इसी प्रयास से हुर्रियत नेताओं (अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और अब्दुल गनी लोन) ने युद्धविराम के पक्ष में संयुक्त बयान दिया।
मलिक ने आगे दावा किया कि फरवरी 2006 में उसे तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने औपचारिक वार्ता के लिए बुलाया। उसके मुताबिक, उस बैठक में मनमोहन सिंह ने कहा था कि भारत कश्मीर मुद्दे के समाधान की गंभीर कोशिश कर रहा है और उन्होंने आश्वासन दिया था कि मैं इस मुद्दे को हल करना चाहता हूं। बता दें कि गत 11 अगस्त को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने यासीन मलिक को आतंकी फंडिंग मामले में मृत्युदंड देने की मांग की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मलिक को चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने का समय दिया है। अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी। सरकार का आरोप है कि मलिक अलगाववाद और आतंकवादी गतिविधियों के जरिए भारत की संप्रभुता को चुनौती देता रहा है और पाकिस्तान समर्थित आतंकियों से उसके गहरे संबंध रहे हैं।

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