February 15, 2026

22 दिन बाद वैष्णो देवी यात्रा फिर शुरू, भक्त बोले-चलो बुलावा आया है

नई दिल्ली। 22 दिन बाद 17 सितंबर से श्री वैष्णो देवी यात्रा फिर शुरू हो गई है। अर्धकुंवारी में लैंडस्लाइड की वजह से व्यापक पैमाने पर नुकसान हुआ था, जिसके बाद माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग को बंद कर दिया गया था। तीन सप्ताह से भी ज्यादा समय से यात्रा मार्ग को दुरुस्त करने का काम चल रहा था। पुनर्निर्माण के काम में जुटे अधिकारियों-कर्मचारियों का प्रयास रंग लाया और नवरात्रि से ठीक पहले माता वैष्णो देवी मार्ग को बहाल कर दिया गया है। 22 दिन के विराम के बाद शुरू हुई यात्रा को लेकर भक्तों में खास उत्साह देखा जा रहा है। आधार शिविर कटरा स्थित रजिस्ट्रेशन काउंटर पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है। चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है एक बार फिर सुनाई देने लगा है।

बता दें कि इससे पहले, श्राइन बोर्ड ने 14 सितंबर को यात्रा फिर से शुरू करने का फैसला किया था, लेकिन लगातार बारिश के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था। इससे कुछ श्रद्धालुओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था और सुरक्षा घेरे को तोडऩे और तीर्थस्थल बोर्ड के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए तीर्थयात्रा करने का बार-बार प्रयास किया था। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में त्रिकुटा पहाडिय़ों पर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर की तीर्थयात्रा अनुकूल मौसम की स्थिति में बुधवार को फिर से शुरू हो गई है। यह तीर्थयात्रा 26 अगस्त को स्थगित कर दी गई थी, इससे कुछ घंटे पहले ही मंदिर जाने वाले मार्ग पर एक बड़ा भूस्खलन हुआ था। इसमें 34 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी और 20 अन्य घायल हो गए थे। इससे पहले श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, ‘जय माता दी…वैष्णो देवी यात्रा अनुकूल मौसम की स्थिति में 17 सितंबर 2025 (बुधवार) से फिर से शुरू होगी। भक्तों से अनुरोध है कि वे आधिकारिक संचार माध्यमों के माध्यम से अपडेट रहें।

बारिश के कहर ने सब कुछ तबाह कर दिया

बता दें कि पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के जम्मू संभाग में बारिश का कहर जमकर बरसा। भारी से बहुत भरी बरसात और बादल फटने की ताबड़तोड़ घटनाओं ने आमलोगों की जिंदगी को पटरी से उतार दिया। घर से लेकर सडक़ और दुकान तक सब कुछ तबाह हो गया। माता वैष्णो देवी का यात्रा मार्ग भी इससे बुरी तरह से प्रभावित हुआ था। अर्धकुंवारी के पास भीषण लैंडस्लाइड हुआ था। इस हादसे में तकरीबन 3 दर्जन लोगों की मौत हो गई थी। इसके साथ ही यात्रा मार्ग भी बाधित हो गया था। उस घटना के बाद तीर्थयात्रा मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए बंद करना पड़ गया था। तबसे लगातार मार्ग को दुरुस्त करने का काम चल रहा था।