नईदिल्ली
देश में वायु प्रदूषण (Air Pollution) अब जानलेवा बन गया है। सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वायरमेंट (CSE) की डेटा के अनुसार, जहरीले वातावरण के कारण 2020 में देश के लोगों की औसत उम्र करीब 4 साल 11 महीने कम हो गई है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वक्त से हवा में जहरीले कण तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में हवा अब जानलेवा भी बनने लगी है।
CSE की रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रामीण इलाके में रहने वाले लोगों पर सबसे बुरा असर पड़ा है। यहां के लोगों की औसत आयु 5 साल 2 महीने घट गई है। शहर में लोगों में रहने वाले लोगों की औसत आयु 9 महीने ज्यादा है।
सीएसई की रिपोर्ट चार मापदंडों के जरिए तय किया गया है। ये मापदंड हैं, पर्यावरण, कृषि, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 में 365 दिन में से 314 दिन मौसम बेहद खराब रहा। इस दौरान करीब 3,026 लोगों की मौत हुई और करीब 1.9 लाख हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा। 2022 के पहले भाग में लू आम बात रही। वहीं, 2023 में ओलावृष्टि आम हो गई है।
प्लास्टिक के इस्तेमाल ने धरती में जहर घोल दिया है। सीएसई की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2022 में भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन कई जगहों पर अभी भी प्लास्टिक का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है और उसका सीधा असर भारतीयों की उम्र पर पड़ रहा है। जहां तक वातावरण में सुधार और कूड़ा-कचरा प्रबंधन की बात करें तो इस मामले में दक्षिण का राज्य तेलंगाना शीर्ष पर रहा है। इसके बाद गुजरात, गोवा और महाराष्ट्र का नंबर आता है। सबसे निचले नंबर पर राजस्थान, नगालैंड और बिहार हैं।

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