September 24, 2026

‘Tenzing’ का दमदार ट्रेलर रिलीज, एवरेस्ट फतह की अनकही कहानी दिखाएगी फिल्म

एवरेस्ट की चोटी पर खड़े दो इंसान दुनिया के लिए शायद एक ही तस्वीर हैं. नाम हैं एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नॉर्गे लेकिन इतिहास की उस मशहूर तस्वीर के पीछे एक कहानी ऐसी भी है, जिसमें सिर्फ बर्फ, पहाड़ और मौत का खतरा नहीं था, बल्कि पहचान, बराबरी, वर्ग और अपने सपने को अपना कहने की जिद भी थी. एप्पल ओरिजिनल फिल्मस की आने वाली फिल्म Tenzing का ट्रेलर इसी अनकही कहानी को सामने लाता है.

पहली नजर में यह एक माउंटेनियरिंग एडवेंचर फिल्म लगती है, लेकिन कुछ ही मिनटों में साफ हो जाता है कि निर्देशक जेनिफर पीडम का मकसद सिर्फ एवरेस्ट की ऊंचाई दिखाना नहीं है. वह उस आदमी के भीतर उतरना चाहती हैं, जिसके लिए यह पहाड़ दुनिया की सबसे ऊंची चोटी भर नहीं, बल्कि आस्था और जिंदगी का हिस्सा था.

फिल्म में तेनजिंग नॉर्गे का किरदार जेंडन फुंत्सोक ने निभाया है जबकि हॉलीवुड स्टार टॉम हिडलस्टन माउंटेनियर एडमंड हिलेरी के किरदार में हैं जबकि विलियम डफोए ब्रिटिश अभियान के लीडर कर्नल जॉन हंट के रोल में हैं. ट्रेलर की सबसे दिलचस्प बात यह है कि कहानी को सिर्फ हिलेरी और तेनजिंग के एवरेस्ट फतह तक नहीं समेटा गया है. यहां तेनजिंग एक ऐसे शख्स के तौर पर दिखाई देते हैं जो वर्षों तक ब्रिटिश अभियानों में काम करते रहे, लेकिन उनके लिए सिर्फ किसी और के अभियान का हिस्सा बनना पर्याप्त नहीं था.वह उस पहाड़ पर चढ़ना चाहते थे, जिसे बचपन से अपना मानते आए थे.

यहीं से फिल्म का असली संघर्ष शुरू होता है. ब्रिटिश पर्वतारोही एवरेस्ट को एक ऐसी चोटी की तरह देखते हैं जिसे इंसान को जीतना है, जबकि तेनजिंग के लिए वह आस्था का सवाल है. वह उसे चोमोलुंगमा यानी पवित्र देवी के तौर पर पूजते हैं. इस तरह एक ही पहाड़ को देखने के दो बिल्कुल अलग नजरिए. ट्रेलर इस फर्क को बहुत खूबसूरती से पकड़ता है.

तेनजिंग की नजर में यह प्रकृति के खिलाफ लड़ाई नहीं, बल्कि उसके साथ एक रिश्ता है. यही वजह है कि फिल्म का एवरेस्ट सिर्फ एक लोकेशन नहीं बल्कि कहानी का एक जीवित किरदार महसूस लगता है. इस कहानी में एक और अहम लड़ाई है, सम्मान की लड़ाई.

1953 के ब्रिटिश अभियान में तेनजिंग को सिर्फ सामान ढोने वाले शेरपा की भूमिका तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं था. कहानी में वह चाहते हैं कि उन्हें बाकायदा क्लाइंबिंग टीम का मेंबर माना जाए. यही छोटी-सी लगने वाली मांग फिल्म के बड़े सामाजिक और ऐतिहासिक सवाल को सामने लाती है कि जिस व्यक्ति को उस पहाड़ का रास्ता सबसे ज्यादा पता है, क्या उसे सिर्फ इसलिए पीछे रखा जा सकता है क्योंकि वह ब्रिटिश नहीं है? फिल्म इसी सवाल को बिना भाषण दिए कहानी के भीतर रखने की कोशिश करती दिखती है.

ट्रेलर में एडमंड हिलेरी की भूमिका में टॉम काफी सधे नजर आए हैं. फिल्म दोनों को प्रतिद्वंद्वी बनाने के बजाय दो अलग दुनिया से आए ऐसे लोगों के रूप में देखती है, जिनके बीच धीरे-धीरे सम्मान और भरोसा पैदा होता है. ऊंचाई पर पहुंचते-पहुंचते वर्ग और पद की सीमाएं पीछे छूट जाती हैं और दो पर्वतारोही एक-दूसरे के साथी बनते हैं. यही शायद फिल्म का सबसे मानवीय हिस्सा है कि इतिहास ने दोनों के नाम एक साथ लिखे, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए दोनों को अलग-अलग रास्तों से गुजरना पड़ा था.

फिल्म का एक और खूबसूरत किरदार तेनजिंग का परिवार और विशेष रूप से उनकी पत्न ही. उनकी पत्नी सिर्फ उनकी निजी जिंदगी का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उनके सपने को समझने और उसे आगे बढ़ाने वाली शख्सियत के रूप में दिखाई देती हैं. ट्रेलर में पहाड़ की तरफ बढ़ते तेनजिंग के साथ घर-परिवार और उस सपने की कीमत भी दिखाई देती है. इस वजह से एवरेस्ट की चढ़ाई सिर्फ रोमांच नहीं रह जाती. हर कदम के साथ यह सवाल भी चलता है कि एक आदमी अपने सबसे बड़े सपने के लिए कितना कुछ पीछे छोड़ सकता है.

फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट भी ट्रेलर की बड़ी ताकत है. बर्फ से ढके पहाड़, पतली हवा में तेज होती सांसें, खामोशी को चीरती हवाएं और एवरेस्ट की खतरनाक ऊंचाइयां सब मिलकर दर्शक को उस वातावरण में ले जाने की कोशिश करते हैं. खासतौर पर पहाड़ के एरियल विजुअल और बर्फ की आवाज एक गजब अनुभव है.

फिर भी तेनजिंग का सबसे बड़ा आकर्षण यही है कि यह एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि को दूसरे नजरिए से देखने की कोशिश करती है, जिसे दुनिया दशकों से एक ही तस्वीर में देखती आई है. एवरेस्ट पर पहुंचने की कहानी हम जानते हैं, लेकिन उस चोटी तक पहुंचने से पहले तेनजिंग को अपनी जगह बनाने के लिए कितनी बार शुरू से शुरुआत करनी पड़ी, यह कहानी कम कही गई है. फिल्म उसी खाली जगह को भरने की कोशिश करती है.