मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का जवाब-आदिवासियों को 26500 वन अधिकार पट्टे बांटे गये
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के छठवें दिन सोमवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश में साढ़े तीन लाख वन अधिकार पट्टे निरस्त करने का मामला उठाया। कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि आदिवासियों की जमीनें जबरन छीनीं जा रही हैं।
इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुये कहा कि यह कहना गलत है। हमारी सरकार के कार्यकाल में आदिवासियों को सबसे ज्यादा 26,500 वन अधिकार पट्टे बांटे गए। सदन में जन जातीय कार्य मंत्री विजय शाह भी मौजूद रहे। उन्होंने ध्यान आकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा कि सैटेलाइट इमेज के जरिए दिसंबर 2005 की स्थिति की जानकारी लेकर वन अधिकार पट्टों के मामले में निर्णय किया जाएगा।
कुपोषित बच्चों के साथ हो रहा भेदभाव
झाबुआ विधायक विक्रांत भूरिया ने कहा कि प्रदेश के कुपोषित बच्चों पर सरकार सिर्फ 8 रुपये प्रति बच्चा खर्च कर रही है। जबकि मंत्रियों के एक दिन के नाश्ते में 19,000 के ड्राई फू्रट मंगाये जाते हैं। उन्होंने कहा यह आदिवासी और कुपोषित बच्चों के साथ भेदभाव है।
विजयवर्गीय और पटेल ने तीन विधेयक पेश किये
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस दौरान मध्य प्रदेश महानगर क्षेत्र नियोजन और विकास विधेयक पेश किया। इसके बाद श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कारखाना मध्य प्रदेश संशोधन विधेयक 2025 और मध्यप्रदेश दुकान तथा स्थापना संशोधन विधेयक पेश किया।
सिंगरौली में केंद्रीय सहकार बैंक क्यों नहीं?
भाजपा विधायक रामनिवास शाह प्रश्नकाल के दौरान कहा कि सीधी को सिंगरौली से अलग हुए करीब 17 वर्ष हो चुके हैं। लेकिन सिंगरौली में आज तक केंद्रीय सहकारी बैंक की स्थापना नहीं हुई है। इस कारण लोगों को 120 किलोमीटर दूर सीधी जाना पड़ता है। इस पर सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि यह समस्या अकेले सिंगरौली जिले की नहीं है। प्रदेश में 55 जिले बने हुए हैं जिसमें 38 जिलों में ही सहकारी बैंक का मुख्यालय है। नाबार्ड व आरबीआई के नॉम्र्स के कारण अन्य जिलों में मुख्यालय नहीं खुल पा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि जहां मुख्यालय नहीं है वहां क्षेत्रीय कार्यालय खोले जाएंगे। इसके साथ ही उनमें नोडल अधिकारी नियुक्त होंगे।

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