November 8, 2026

सारंग का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोले- जनहित नहीं बल्कि राजनीतिक चेहरा चमकाने का मंच बना रही विधानसभा

भोपाल 

विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र की अवधि को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से पांच दिवसीय सत्र पर सवाल उठाए जाने के बाद मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायकों ने पुराने सत्रों में ऐसा कौन-सा काम किया है, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने विधानसभा का सदुपयोग किया। कांग्रेस सत्र के दौरान केवल नकारात्मक बातें करती है। उसके विधायक जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय अपना राजनीतिक चेहरा चमकाने के लिए सदन का इस्तेमाल करते हैं। सारंग ने कहा कि भाजपा सरकार विधानसभा सत्र का सदुपयोग करती है और हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार रहती है। जिस विधायक दल में अनुशासन नहीं है और जहां नेता प्रतिपक्ष को ही नेता नहीं माना जाता, उसे इस तरह के सवाल नहीं उठाने चाहिए। 

सफाई मित्रों को दी हड़ताल खत्म करने पर बधाई
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने पर सारंग ने कहा कि वे सफाई मित्रों को बधाई देते हैं कि उन्होंने त्योहार के समय अपनी हड़ताल समाप्त कर दोबारा काम शुरू किया। उन्होंने कहा कि शहर में जो सफाई दिखाई देती है, वह सफाई कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। उनके काम का सम्मान किया जाना चाहिए। 

दिग्विजय सिंह की यात्रा पर भी साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए सारंग ने कहा कि वे कभी सकारात्मक बात नहीं करते। उनकी यात्रा सनातन को तार-तार करने की यात्रा है। सारंग ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह का इतिहास अच्छा नहीं रहा है। जब वे मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने हिंदुओं का सम्मेलन नहीं होने दिया था। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह हिंदू धर्म को घृणा, अलगाव और बिखराव से जोड़कर पेश कर रहे हैं, जबकि पूरी दुनिया में हिंदू धर्म को शांति का धर्म माना जाता है। सारंग ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। 

पांच दिन के सत्र को लेकर उमंग सिंघार ने उठाए सवाल
बता दें नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए विधानसभा के शीतकालीन सत्र की अवधि पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि 7 से 11 दिसंबर तक केवल पांच दिन का सत्र बुलाया गया है। इससे पहले मानसून सत्र भी पांच दिन के लिए निर्धारित था, लेकिन उसे तीन दिन में ही समाप्त कर दिया गया था। सिंघार ने बालाघाट में बच्चों की मौत, सागर और देवास में जहरीली शराब से मौतें, किसानों की परेशानी, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए ज्यादा समय देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार सदन छोटा कर सकती है, जनता के सवाल नहीं।