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यूक्रेन और रूस के बीच डेढ़ साल से भी ज्यादा समय से युद्ध चल रहा है। खुद से बेहद ताकतवर रूस को टक्कर देने के लिए यूक्रेन अपने सहयोगियों से मदद मांगने के अलावा, नए-नए हथकंडे भी अपना रहा है। अब खबर आ रही है कि यूक्रेन ने नकली हथियारों से रूस के छक्के छुड़ा रखे हैं। मेटिनवेस्ट की लड़ाई में यूक्रेनी स्टीलवर्कर्स असली दिखने वाले नकली हथियारों के साथ रूसी सैनिकों को मात दे रहे हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के सबसे बड़े स्टील प्लांट में बड़ा खेला किया जा रहा है। यहां के स्टीलवर्कर्स हॉवित्जर, रडार सिस्टम और मोर्टार लॉन्चर जैसी एडवांस डिफेंस सिस्टम की नकल करने के लिए स्क्रैप लकड़ी, मेटल और प्रयुक्त टायर का इस्तेमाल कर रहे हैं। मेटिनवेस्ट के वर्कर्स ने यूक्रेनी सैनिकों के लिए 250 से अधिक नकली हथियार तैयार किए हैं। रूसी सेना इन नकली हथियारों पर अपना बहुमूल्य गोला-बारूद खर्च कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन स्टीलवर्कर्स ने उस समय अपना ऑपरेशन शुरू किया था जब रूसी सैनिक पिछले फरवरी में मध्य-पूर्वी यूक्रेन की ओर बढ़ रहे थे। मेटिनवेस्ट स्टील फैसिलिटी के चीफ ने बताया, "हमने बक्सों, प्लास्टिक और यहां उपलब्ध किसी भी सामग्री का इस्तेमाल किया। यहां तक कि कूड़े में फेंकी गई वस्तुओं का भी इस्तेमाल किया और नकली हथियार बनाए हैं। हमारे पास हथियार नहीं थे लेकिन हमने ऐसा दिखाया कि हमारी सेना बड़ी और मजबूत है और हम लड़ने के लिए तैयार थे।" उन्होंने कहा, "यह (जुगाड़) काम कर गया! हमने उन्हें डरा दिया।"
जैसे-जैसे युद्ध जारी रहा, यूक्रेन ने नकली हथियारों का जखीरा खड़ा कर दिया। उन्होंने पुराने रूसी तेल बैरल से बने रडार रिफ्लेक्टर भी बनाए। रिपोर्ट के मुताबिक, इन फर्जी हथियारों को बनाने में लगभग 1,000 यूरो का खर्च आता है, जो 1.1 मिलियन डॉलर की मिसाइलों का एक मामूली अंश है। रूसी सैनिक इन 1,000 यूरो के बने नकली हथियारों पर अपनी मिलियन डॉलर की मिसाइलें दाग रहे हैं।
फैक्ट्री के प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें बेहद सफलता मिली है। दुश्मन ने इन धोखे के हथियारों पर अपना असली माल और सैनिकों की ऊर्जा खर्च की है। इससे दुश्मन के मूल्यवान शस्त्रागार भी खत्म हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी डिजाइन इस कदर असली लगती है कि कोई भी धोखा खा जाए। इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह उल्लेखनीय है कि अतीत में भी सेनाओं ने लंबे समय से अपने विरोधियों को मात देने के लिए नकली हथियारों का इस्तेमाल किया है। द्वितीय विश्व युद्ध में फुलाए जाने वाले टैंक और हवाई हमले के लिए पैराशूटिंग डमी तक का इस्तेमाल किया गया था। यूक्रेनी सैनिकों ने रूसी सेनाओं से बचने के लिए ऐसी चालाक रणनीतियों और अवसरवादी हमलों पर भरोसा करना शुरू कर दिया है।

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