नई दिल्ली
आर अश्विन का रिटायरमेंट टीम इंडिया में एक बड़े बदलाव की पहल साबित हो सकते हैं। आने वाले दिनों में हमें कई और सीनियर प्लेयर्स क्रिकेट को अलविदा कहते हुए नजर आ सकते हैं, ताकि अगली पीढ़ी के लिए जगह बन सके। क्रिकबज की एक रिपोर्ट के अनुसार इसकी शुरुआत अगले साल जून-जुलाई में होने वाले इंग्लैंड दौरे से पहले हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया में चल रही बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी WTC चक्र की भारत की आखिरी सीरीज है और यह भारत की "ओजी पीढ़ी" के लिए आखिरी हो सकती है।
अश्विन के साथ-साथ विराट कोहली, रोहित शर्मा अजिंक्य रहाणे, चेतेश्वर पुजारा और रविंद्र जेडाज उस ग्रुप का हिस्सा थे, जिन्होंने 2012 और 2013 के बीच इसी तरह के बदलाव से गुजर रही टीम इंडिया में कोर खिलाड़ियों के रूप में अपनी जगह बनाई थी। उस दौरान सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण ने अपनी-अपनी जगह खाली की थी।
कप्तान रोहित भले ही बार-बार सभी को यह याद दिलाने की कोशिश करें कि जो भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है उसके लिए "दरवाजे खुले हैं", लेकिन यह पहले से तय था कि टीम इंडिया पुजारा और रहाणे से आगे बढ़ चुकी है। अश्विन को भी कुछ ऐसे ही संकेत मिले, क्योंकि न्यूजीलैंड सीरीज में अचाक वॉशिंगटन सुंदर की एंट्री हुई और बीजीटी में पर्थ टेस्ट में उन्हें ही जडेजा और अश्विन से ऊपर मौका दिया गया।
क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार अश्विन का यह निर्णय कितना प्लान्ड था, यह निर्धारित करना कठिन है, लेकिन भारतीय टीम में जल्द ही बदलाव होने की उम्मीद है- संभवतः 2025 की गर्मियों में इंग्लैंड में उनकी अगली टेस्ट सीरीज की शुरुआत तक… यह असंभव है कि कोई भी खुले तौर पर स्वीकार करेगा कि यह एक संकेत था, लेकिन एक धारणा है कि यह घोषणा सिर्फ एक शुरुआत है, ठीक उसी तरह जैसे 2008 में हुआ था, जब कई वरिष्ठ खिलाड़ी जल्दी-जल्दी रिटायर हो गए थे।

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