त्रिवर्षीय रोलिंग बजट वाला पहला राज्य बनेगा मध्यप्रदेश
भोपाल। मोहन सरकार ने मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिये बजट को अगले 5 वर्ष में दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसी कड़ी में अब राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक विकास की ठोस रणनीति तैयार करते हुए शून्य आधारित बजटिंग (र्ंद्गह्म्श क्चड्डह्यद्गस्र क्चह्वस्रद्दद्गह्लद्बठ्ठद्द) और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है।
वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि अब तक देश के अधिकांश राज्यों में पारंपरिक बजटिंग पद्धति लागू होती रही है, जिसमें पिछले वर्षों का व्यय आधार बनते थे। इसके विपरीत जीरो बेस्ड बजटिंग में हर योजना को शून्य से शुरू कर उसकी उपयोगिता सिद्ध करनी होगी। इससे अप्रभावी योजनाएँ स्वत: समाप्त होंगी और संसाधनों का इष्टतम उपयोग संभव होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने इस प्रणाली को अपनाया है, जहाँ इससे गुड गवर्नेंस और फाइनेंशियल डिसिप्लिन को मजबूती मिली है। रोलिंग बजट पद्धति से 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लिए बजट बनेगा और हर वर्ष इसकी समीक्षा कर नए अनुमानों को जोड़ा जाएगा। इससे योजनाएँ हमेशा आगे की ओर देखने वाली होगी और अल्पकालिक दबाव से मुक्त होकर दीर्घकालिक विकास को गति मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल कॉर्पोरेट जगत में पहले से सफल साबित हो चुका है, और राज्य शासन में इसे लागू करना नीतिगत दूरदर्शिता का प्रतीक है।
वेतन-भत्तों के लिये नई गाइड लाइन
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 16प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 23 प्रतिशत बजट सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही वेतन, पेंशन , भत्तों की गणना में पारदर्शिता हेतु नई गाइडलाइन लागू होंगी। इसके अतिरिक्त ऑफ-बजट व्यय और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के वित्तीय प्रभाव को भी अब राज्य बजट में समाविष्ट किया जाएगा। यह व्यवस्था वित्तीय अनुशासन के साथ जनहित में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।
वित्तीय सुधारों में गेम चेंजर होगा
देश के अन्य राज्यों में अभी भी पारंपरिक बजटिंग पद्धति पर निर्भरता बनी हुई है। मध्यप्रदेश का यह निर्णय वित्तीय सुधारों की दिशा में गेम-चेंजर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में केंद्र और अन्य राज्य भी इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
क्या बोले वित्तमंत्री
उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि यह पहल विकसित मध्यप्रदेश 2047 की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में ठोस आधार बनेगी और देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श साबित होगी। शून्य आधारित बजटिंग और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट से न केवल प्रदेश की योजनाओं का ठोस मूल्यांकन होगा, बल्कि प्रत्येक खर्च का सीधा संबंध समाज की आवश्यकताओं और राज्य की प्राथमिकताओं से जोड़ा जा सकेगा। यह कदम मध्यप्रदेश को विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश 2047 की दिशा में सबसे मजबूत आधार प्रदान करेगा।

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