October 10, 2026

Navratri 2026: 11 अक्टूबर से शुरू नवरात्रि, पहले दिन जरूर करें ये 5 शुभ काम

Navratr 2026
नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर, रविवार से आरंभ हो रहा है। देवी आराधना के लिए समर्पित इन नौ दिनों में भक्त श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। मान्यता है कि नवरात्रि में विधि-विधान से की गई साधना मन को शांति देने के साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ाती है। ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन यानी आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से कुछ विशेष कार्य करना शुभ माना जाता है।

1. कलश स्थापना करें
नवरात्रि के प्रथम दिन घर में विधि-विधान से कलश स्थापित करना शुभ माना जाता है। कलश को शक्ति, समृद्धि और जीवन का प्रतीक माना जाता है। देवी पूजा की शुरुआत कलश स्थापना और मां दुर्गा के आह्वान से की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक कलश की स्थापना भक्त को नियमित पूजा, जप और साधना से जोड़े रखती है।

2. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष महत्व रखता है। संभव हो तो प्रतिदिन इसका पाठ करें। यदि समय कम हो तो देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक स्तोत्र का नियमित पाठ किया जा सकता है। सुविधा के अनुसार दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों को नौ दिनों में बांटकर भी पढ़ा जा सकता है। मान्यता है कि देवी की महिमा का पाठ करने से मनोबल बढ़ता है और मां की कृपा प्राप्त होती है।

3. नवार्ण मंत्र का जाप करें
नवरात्रि में नवार्ण मंत्र का जाप देवी उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मंत्र है- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'। मान्यता के अनुसार इस मंत्र के जाप से मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और मां काली की आराधना का फल प्राप्त होता है। इसे रुद्राक्ष की माला से जप सकते हैं। समय कम हो तो रोज कम से कम एक माला यानी 108 बार जाप करें।

4. कन्याओं को भोजन कराएं
नवरात्रि में कन्या पूजन और कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में कन्याओं को देवी स्वरूप माना गया है। सामर्थ्य हो तो प्रतिपदा से महानवमी तक कन्याओं को भोजन कराया जा सकता है। किसी अनाथालय में बच्चियों को भोजन कराना भी सेवा का अच्छा माध्यम हो सकता है।

5. जरूरतमंदों की सहायता करें
नवरात्रि केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि सेवा और दान-पुण्य का भी अवसर है। इस दौरान जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल, दवाएं, जूते-चप्पल जैसी उपयोगी वस्तुएं दान करें। सामर्थ्य रखने वाले लोग बच्चों की शिक्षा और पालन-पोषण में सहयोग करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकते हैं। सच्चे मन से की गई सेवा को देवी आराधना का ही एक रूप माना जाता है।