संघ के आगे झुकी मोहन सरकार, कदम पीछे खींचे

बढ़ते दबाव के बीच सिंहस्थ लैंड पुलिंग योजना वापस ली

भोपाल। किसानों के कड़े विरोध और आंदोलन की चेतावनी के आगे अंतत: मोहन सरकार को झुकना पड़ा। सिंहस्थ2028 की तैयारियों के लिए लाई गई विवादित लैंड पुलिंग योजना को सरकार ने सोमवार देर रात निर्णायक रूप से वापस ले लिया। यह फैसला मुख्यमंत्री निवास में हुई उस अहम बैठक के बाद सामने आया, जिसमें भारतीय किसान संघ, भाजपा के पदाधिकारी और उज्जैन क्षेत्र के जनप्रतिनिधि मौजूद थे। किसान संघ पहले ही 18 नवंबर से आंदोलन शुरू करने की घोषणा कर चुका था, जिससे सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था। अंतत: सरकार ने पीछे हटते हुए योजना को निरस्त करने का फैसला किया।

बैठक में सिंहस्थ से जुड़ी परियोजनाओं, जमीन की व्यवस्था और किसानों की आशंकाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कहा कि सिंहस्थ का भव्य स्वरूप दुनिया अवश्य देखेगी, लेकिन किसानों और साधु-संतों के सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा। बैठक में सभी पक्षों की सहमति के बाद लैंड पुलिंग एक्ट को तत्काल प्रभाव से खत्म करने का निर्णय हुआ और नगरीय प्रशासन विभाग को नियम वापस लेने के निर्देश दे दिए गए। बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, किसान संघ अध्यक्ष कमल सिंह आंजना, किसान नेता महेश चौधरी, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने योजना निरस्त होने का स्वागत करते हुए कहा कि मोहन सरकार ने किसानों का सम्मान रखा। उन्होंने कहा, सिंहस्थ के लिए पर्याप्त जमीन पहले से उपलब्ध है। किसानों की जमीन को विवाद में नहीं घसीटा जाना चाहिए था।

किसान संघ विरोध में क्यों उतरा था?

सिंहस्थ के लिए उज्जैन के आसपास की भूमि को एकत्र कर योजनाबद्ध विकास के लिए उपयोग करने की योजना बनाई गई थी। सिंहस्थ-2028 की लैंड पूलिंग योजना में लगभग 17 गांवों को शामिल किया जाना था। इन क्षेत्रों में करीब 2,378 हेक्टेयर कृषि भूमि को अधिग्रहित करने का प्रस्ताव था। इससे लगभग 5,000 किसान प्रभावित होने वाले थे। किसान संघ का तर्क था कि उनकी जमीन पर भविष्य में पुनर्वितरित भूखंडों का स्वरूप और अधिकार स्पष्ट नहीं किए गए थे, और उन्हें मुआवज़ा या हिस्सा मिलने की गारंटी अस्पष्ट थी। किसान संगठन इसे भूमि अधिग्रहण का नया तरीका बताते हुए विरोध कर रहे थे।

सरकार ने कदम पीछे क्यों खींचे?

लैंड पुलिंग योजना तकनीकी निर्णय से अधिक एक राजनीतिक मुद्दा बन चुकी थी। सरकार के पीछे हटने के चार मुख्य कारण माने जा रहे हैं-

1- आंदोलन का दबाव-किसान संघ के 18 नवंबर से आंदोलन के ऐलान ने सरकार के लिए असहज स्थिति बना दी थी। सिंहस्थ जैसे राष्ट्रीय महत्व के आयोजन से पहले सरकार किसी भी नकारात्मक छवि से बचना चाहती थी।
2-संघ की नाराजग़ी-भारतीय किसान संघ, आरएसएस से जुड़ा प्रभावी संगठन है। उसका खुला विरोध भाजपा सरकार पर सीधा राजनीतिक दबाव था।
3-मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र- उज्जैन मुख्यमंत्री मोहन यादव का राजनीतिक आधार है। अपने ही क्षेत्र में किसानों का असंतोष सरकार के लिए जोखिम बन रहा था।
4-सिंहस्थ-2028 की राष्ट्रीय छवि-सिंहस्थ सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान वाला कार्यक्रम है। सरकार किसी विवाद या असंतोष को इसके चारों ओर नहीं चाहती थी।

अब आगे क्या?

-सरकार अब स्वैच्छिक भूमि उपलब्धता, भूमि विनिमय और सरकारी जमीन के उपयोग जैसे विकल्पों पर काम करेगी।
-किसानों को योजना में सहभागी बनाकर नई रूपरेखा तैयार की जाएगी।
-साधु-संतों और स्थानीय हितधारकों से चर्चा कर प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
-सिंहस्थ की तैयारियों की समीक्षा के लिए विभागीय बैठकें अगले महीने से तेज होंगी।